Polki Vs Kundan Jewellery: पोल्की और कुंदन जूलरी दिखने में एकसी, फर्क कैसे पहचानें? कौनसी ज्यादा एक्सपेंसिव

Published : Jul 13, 2026, 09:30 PM IST

Compare Polki and Kundan Jewellery: पोल्की और कुंदन जूलरी भले ही पहली नजर में एक जैसी दिखाई दें, लेकिन दोनों में बड़ा अंतर होता है। खरीदारी से पहले इन दोनों के अंतर को समझना आपको सही फैसला लेने में मदद करेगा।

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Polki Vs Kundan Jewellery: पोल्की और कुंदन जूलरी दिखने में एकसी, फर्क कैसे पहचानें? कौनसी ज्यादा एक्सपेंसिव

भारतीय ट्रेडिशनल जूलरी की बात हो और पोल्की (Polki) व कुंदन (Kundan) का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। शादी, रिसेप्शन, तीज, करवा चौथ और त्योहारों के दौरान महिलाएं इन दोनों तरह की जूलरी पहनना पसंद करती हैं। पहली नजर में पोल्की और कुंदन जूलरी लगभग एक जैसी दिखाई देती हैं, इसलिए अक्सर लोग दोनों को लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं। लेकिन वास्तव में इनकी बनावट, इस्तेमाल होने वाले स्टोन, कीमत और टिकाऊपन में बड़ा अंतर होता है। अगर आप नई जूलरी खरीदने की सोच रही हैं, तो पहले यह जान लेना जरूरी है कि पोल्की और कुंदन जूलरी में क्या फर्क है और आपके लिए कौन-सी बेहतर रहेगी।

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पोल्की जूलरी क्या होती है?

पोल्की जूलरी में अनकट (Uncut) नेचुरल डायमंड का इस्तेमाल किया जाता है। इन हीरों को पूरी तरह काटकर या पॉलिश करके चमकदार नहीं बनाया जाता, बल्कि उनके प्राकृतिक स्वरूप को ही बरकरार रखा जाता है। यही वजह है कि पोल्की जूलरी का लुक रॉयल और विंटेज दिखाई देता है। राजस्थान और मुगलकालीन शाही जूलरी में पोल्की का इस्तेमाल काफी लोकप्रिय था। आज भी कई ब्राइडल कलेक्शन में पोल्की जूलरी पहली पसंद मानी जाती है।

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कुंदन जूलरी क्या होती है?

कुंदन जूलरी बनाने की तकनीक अलग होती है। इसमें असली हीरे की बजाय कांच (Glass Stones), रंगीन स्टोन या अन्य रत्नों को बेहद शुद्ध और मुलायम सोने की परत (Gold Foil) की मदद से जूलरी में जड़ा जाता है। इस प्रक्रिया को ही 'कुंदन सेटिंग' कहा जाता है। कुंदन जूलरी अपनी बारीक कारीगरी, रंगीन डिजाइन और शाही लुक के लिए जानी जाती है। इसे दुल्हन के अलावा त्योहारों और पारिवारिक समारोहों में भी खूब पहना जाता है।

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पोल्की और कुंदन जूलरी में अंतर

इस्तेमाल होने वाला स्टोन: पोल्की जूलरी में प्राकृतिक अनकट डायमंड लगाए जाते हैं, जबकि कुंदन जूलरी में आमतौर पर कांच, कृत्रिम स्टोन या अन्य रत्नों को गोल्ड फॉइल की मदद से सेट किया जाता है।

लुक और चमक: पोल्की की चमक हल्की, सॉफ्ट और नेचुरल होती है। वहीं कुंदन जूलरी ज्यादा चमकदार और रंगीन दिखाई देती है, क्योंकि इसमें पॉलिश किए गए स्टोन लगाए जाते हैं।

कीमत: पोल्की जूलरी में प्राकृतिक अनकट डायमंड का इस्तेमाल होने के कारण इसकी कीमत काफी अधिक होती है। दूसरी ओर, कुंदन जूलरी अपेक्षाकृत कम कीमत में अवेलेबल हो जाती है। हालांकि, यदि कुंदन जूलरी सोने में बनी हो और उस पर महीन हस्तकला की गई हो, तो उसकी कीमत भी काफी ज्यादा हो सकती है।

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पोल्की-कुंदन की मेकिंग और टिकाऊपन

पोल्की-कुंदन की मेकिंग: पोल्की जूलरी बनाने में अनकट डायमंड को सावधानी से सेट किया जाता है। वहीं कुंदन जूलरी में गोल्ड फॉइल के साथ स्टोन जड़ने की ट्रेडिशनल टैक्निक अपनाई जाती है, जिसमें कारीगरों की बारीक हस्तकला की अहम भूमिका होती है।

पोल्की-कुंदन का टिकाऊपन: दोनों प्रकार की जूलरी अच्छी देखभाल के साथ लंबे समय तक चल सकती हैं। हालांकि, इन्हें नमी, परफ्यूम और तेज केमिमल से बचाकर रखना चाहिए ताकि उनकी फिनिश और चमक बनी रहे।

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कौन-सी जूलरी ज्यादा महंगी होती है?

आमतौर पर पोल्की जूलरी कुंदन जूलरी से ज्यादा महंगी होती है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक अनकट डायमंड का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं कुंदन जूलरी की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि वह गोल्ड, सिल्वर या अन्य धातु में बनी है और उसमें किस क्वालिटी के स्टोन लगाए गए हैं। अगर आप पोल्की जूलरी खरीद रही हैं, तो विश्वसनीय जूलर से ही खरीदें और उसकी प्रामाणिकता से जुड़े दस्तावेज जरूर लें। कुंदन जूलरी खरीदते समय उसकी फिनिशिंग, स्टोन की फिटिंग और धातु की क्वालिटी जांचें। साथ ही, अपनी जरूरत और बजट के अनुसार ही चुनाव करें।

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