
ट्रेवल डेस्क। देशभर में 31 अक्टूबर को दिवाली का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। आज का दिन अच्छाई की बुराई पर जीत और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है। वैसे तो भारत विविधताओं का देश है,जहां अलग-अलग तरीके दिवाली मनाई जाती है। ऐसे में हम आपके लिए उन राज्यों के बारे में बताएंगे,जहां दिवाली का रंग दूसरी जगहों से बिल्कुल अलग होता है।
उत्तर भारत में दिवाली का जश्न भगवान राम के 14 साल बाद के वनवास बाद अयोध्या लौटने की खुशी पर मनाया जाता है। यहां लोग दीये जलाते हैं,रंगोली बनाते हैं। वहीं,कई जगह रामलीला का मंचन किया जाता है। जहां बाल्यकाल से लेकर अयोध्या लौटने तक की कहानी दर्शाई जाती है।
दिवाली पर आपने लक्ष्मी-गणेश की पूजा के बारे में सुना होगा लेकिन पश्चिम बंगाल में दिवाली के दिन मां काली की पूजा होती है। जो बुरी शक्तियों को नष्ट करने वाली देवी मानी जाती हैं। वहीं, यहां बड़े पंडाल भी लगते हैं जहां रातभर अनुष्ठान चलते हैं।
महाराष्ट्र में दीपावली खास अंदाज में मनाई जाती है। यहां पर रोशनी के त्योहार का जश्न वासु बारस से शुरू होता है, जिसमें गायों और बछड़ों की पूजा की जाती है। इसके बाद दिवाली मनाई जाती है। दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है। जहां खास मराठी मिठाइयां बनाई जाती हैं।
दक्षिण भारत में दिवाली का अनोखा रंग देखने को मिलता है। जहां तमिलनाडु में थलाई दीपावली मनाई जाती है। ये फेस्टिवल नवविवाहित जोड़ों के लिए खास होता है। इस दिन न्यूलीवेड कपल दुल्हन के घर जाते हैं। यहं पर पटाखों की बजाय घर के बाहर कोलम बनाया जाता है।
इससे इतर देश के सबसे छोटे राज्य गोवा में भी दीपावली की छठा देखते बनती है। यहां पर नरकासुर वध की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें भगवान कृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर के वध का जश्न मनाया जाता है। ये ट्रेडिशन गोवा के अलावा आपको कहीं और नहीं मिलेगा।
सोशल मीडिया पर आपने देव दीपावली के कई वीडियो देखे होंगे। ये पर्व वाराणसी में मनाया जाता है जो दिवाली के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा की रात को पड़ता है। इस दिन प्रदेश सरका गंगा के तटों पर लाखों दीये जलवाती हैं। मान्यता है देवदीपावली पर वता गंगा में स्नान करने के लिए आते हैं।
इससे इतर ओडिशा में भी दिवाली का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। दिवाली के मौके पर यहां पर कौंरिया काठी की रस्म की जाती है। जहां क्ष्मी पूजा के बाद घर के सामने जूट की लकड़ियाँ जलाते हैं। इसे बड़ाबदुआ डाका कहा जाता है, जिसमें लोग अपने पूर्वजों से आशीर्वाद मांगते हैं। ये पूजा घर के पूर्वजों की आत्मा शांति के लिए की जाती है।
गुजरात में हर चीज अलग ढंग से होती है। जहां वाली हिंदू कैलेंडर के हिसाब से साल का अंत और नए साल की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन व्यापारी दुकानों के साथ व्यापार की पूजा करते हैं। जिसे चोपड़ा पूजन के नाम से जाना जाता है। दिवाली के दिन गुजरात में शारदा पूजन होता है, जिसमें शिक्षा और धन से जुड़े उपकरणों की पूजा की जाती है।
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