गांव और शहरों में अक्सर फेरीवाले पुरानी साड़ियों के बदले पैसे, बर्तन या प्लास्टिक का सामान देते हैं। आखिर वे इन बेकार समझी जाने वाली साड़ियों का क्या करते हैं? आइए इसका पूरा गणित समझते हैं।
व्यापारी हर खरीदी गई साड़ी की क्वालिटी, कपड़े का प्रकार, रंग, स्थिति और जरी की जांच करके उन्हें अलग-अलग कैटेगरी में बांटते हैं।
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री-सेल के लिए अलग रखते हैं ठीक साड़ी
अच्छी हालत वाली साड़ियों को री-सेल के लिए अलग रखते हैं। थोड़ी खराब साड़ियों को अल्टरेशन और पूरी तरह फटी साड़ियों को रीसाइक्लिंग के लिए भेजते हैं।
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ऐसे करते हैं पुराने कपड़ों को नया
कम इस्तेमाल हुई अच्छी साड़ियों को व्यापारी ड्राई क्लीन और मांडी करवाकर चमकाते हैं। फिर इन्हें सेकंड हैंड कपड़ों के बाजार या छोटे दुकानदारों को बेच देते हैं।
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थैले, कुशन कवर, डोरमैट और सजावटी सामान
जो साड़ियां पहनने लायक नहीं रहतीं, उनसे थैले, कुशन कवर, डोरमैट और सजावटी सामान बनाते हैं। सिल्क की साड़ियों का इस्तेमाल नए तरह के कपड़े तैयार करने में होता है।
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सिल्क साड़ियों की जरी में असली चांदी और सोने
पुरानी कांजीवरम और बनारसी सिल्क साड़ियों की जरी में असली चांदी और सोने का पानी होता है। सुनार इन साड़ियों को जलाकर उसमें से कीमती धातु निकाल लेते हैं। हालांकि, आजकल बाजार में नकली जरी भी काफी आ रही है।
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सफाई के काम में लाते हैं बेकार कपड़ों को
बिल्कुल बेकार कपड़ों को कतरन में काटकर सफाई के काम में लाते हैं या रीसायकल करके नया धागा बनाते हैं। इसलिए कीमती जरी या प्योर सिल्क साड़ियां बेचने से पहले किसी जानकार से उनकी सही कीमत जरूर जान लें।
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