
ट्रैवल डेस्क। प्रयागराज में इन दिनों महाकुंभ मेला लगा हुआ है। हर रोज करोड़ लोग त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। हालांकि गंगा नदी तक पहुंचना किसी मुश्किल से कम नहीं है। आप भी अगर भीड़भाड़ से अलग गंगा स्नान करना चाहते हैं तो इन घाटों को जरूर एक्सप्लोर करें। जहां पर गंगा स्नान के साथ शांति का अनुभव कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं, उन जगहों के बारें में-
संगम वीआईपी घाट प्रयागराज के सबसे प्रमुख घाटों में से हैं। जहां युमना-गंगा और सरस्वती का संगम होता है। यहां पर महाकुंभ के दौरान भारी भीड़ रहती हैं। आप महाकुंभ घूमने आ रहे हैं तो इसे जरूर विजिट करें।
प्रयागराज का दशाश्वमेध घाट सैलानियों के साथ बीच खूब प्रसिद्ध हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां पर भगवान ब्रह्मा ने दस अश्वमेध यज्ञ किये थे। यहां पर आप भव्य गंगा आरती निहार सकते हैं।
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प्रयागराज के सबसे शांत घाटों में सरस्वती घाट का नाम जरूर लिया जाता है। अगर आप गंगा नदी के किनारे कुछ शांति के पल बिताना चाहते हैं तो यहां आ सकते हैं। आध्यात्मिक ऊर्जा के संचार के लिए जगह बेस्ट है।
यमुना नदी के किनारे स्थित अरैल घाट अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां पर लोग नौका विहार का आनंद लेते हैं और सूर्यास्त के दृश्य को देखने आते हैं।
बरगद घाट का नाम यहां स्थित विशाल बरगद के पेड़ के कारण पड़ा है। यह घाट धार्मिक अनुष्ठानों और स्नान के लिए महत्वपूर्ण है। यहां की हरियाली और प्राकृतिक वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां पर श्रद्धालु योग और ध्यान लगाते हुए मिल जायेंगे।
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प्रयागराज आने पर काली घाट का दीदार जरूर करें। ये घाट मां काली को समर्पित है। ये स्थान धार्मिक जगह के साथ ऐतिहासिक धरोहरों में भी शामिल है। यहां पर दूर-दूर से लोग मां काली की पूजा करने आते हैं।
बलुआ घाट अपनी प्राचीनता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। यह घाट कुंभ मेले के दौरान विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। यहां पर मेले का आयोजन भी किया जाता है।
गऊ घाट का नाम यहां की धार्मिक मान्यता के कारण पड़ा है। यह घाट गंगा नदी के किनारे स्थित है और यहां पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। महाकुंभ आने पर गऊ का दीदार जरूर करें।
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