
Why indian women put bindi on forehead:भारत की महिलाओं के 16 श्रृंगार में से एक श्रृंगार माथे पर लगाई जाने वाली बिंदी है। वैसे तो यह सिर्फ सुंदरता का प्रतीक नहीं है, बल्कि इसे सुहाग की निशानी भी मानी जाती है। इसके अलावा इसका धार्मिक, संस्कृति और वैज्ञानिक महत्व भी है।बिंदी का संबंध तीसरी आंख यानी ज्ञान और अंतर्ज्ञान के केंद्र से होता है।आइए जानते हैं बिंदी लगाना सिर्फ एक फैशन स्टेटमेंट क्यों नहीं हैं, इसके साइंटिफिक कारण भी जानते हैं।
बिंदी शब्द संस्कृति के बिंदु से लिया गया है। यह कोई साधारण बिंदु नहीं होता है। हिंदू धर्म में यह आज्ञा चक्र का प्रतीक होता है, जो ब्रेन के बीच में स्थित होता है। इसे 'तीसरी आंख' भी कहा जाता है, जो आत्मज्ञान, अंतर्ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति से जुड़ा होता है। बिंदी लगाने से माना जाता है किय ह व्यक्ति को दिव्यता से जोड़ती है और मेंटल बैलेंस बनाए रखती है। यही कारण है कि पूजा-पाठ, धार्मिक आयोजनों और त्योहारों में बिंदी या तिलक लगाने की परंपरा निभाई जाती है।
भारत में बिंदी विवाहित महिलाओं की पहचान भी होती है। लाल रंग की बिंदी खासतौर पर शक्ति की देवी दुर्गा का प्रतीक मानी जाती है। यह प्रेम, ऊर्जा, सुरक्षा और सौभाग्य का प्रतीक होती है। वहीं कुंवारी लड़कियां बिंदी लगाती है तो वो खूबसूरती से जुड़ा होता है।
बिंदी केवल धार्मिक या सांस्कृतिक महत्व नहीं रखती, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी छिपे हैं। आयुर्वेद के अनुसार, माथे के बीचों-बीच का हिस्सा यानी आज्ञा चक्र, शरीर की एनर्जी को कंट्रोल करने का केंद्र होता है। बिंदी या तिलक लगाने से इस हिस्से पर हल्का दबाव पड़ता है जिससे तनाव कम होती है। सिरदर्द में राहत मिलती है और एकाग्रता बढ़ती है। इसके अलावा साइनस की समस्या से आराम मिलता है। शरीब में एनर्जी का बैलेंस बना रहता है।
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