
आपको देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग लकड़ी फर्नीचर के वर्क देखने को मिले होंगे। कम ही लोगों को जानकारी होती है कि घर का मौसम लकड़ी के फर्नीचर की उम्र और मजबूती तय करता है। अगर आप मौसम के हिसाब से गलत लकड़ी का चुनाव करेंगे, तो इससे न सिर्फ आपके पैसे बर्बाद होंगे बल्कि फर्नीचर भी जल्दी खराब हो जाएगा। अगर आपको अब तक इस बारे में जानकारी नहीं थी, तो जानिए कैसे घर के मौसम के हिसाब से सही लकड़ी का चुनाव किया जाता है।
देश के कुछ हिस्से जैसे की मुंबई, केरल, कोलकाता, चेन्नई आदि में नमी वाला मौसम रहता है। ह्यूमिड एरिया में फर्नीचर के लिए सागौन की लकड़ी को बेस्ट माना जाती है। सागौन में नेचुरल ऑयल होता है, जिससे पानी और दीमक का असर इसमें कम होता है। वहीं अगर नमी भी लकड़ी में हो, तो लकड़ी फूलती नहीं है और उसकी शेप बरकरा रहती है। तो अगर आप देश के नमी वाले स्थान में रह रहे हैं, तो सागौन की लकड़ी के फर्नीचर ही चुनें।
और पढ़ें: Summer Bedsheet Designs: गर्मी में Room रहेगा कूल, बेडशीट के चुनें ये 7 डिजाइंस
राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में ज्यादातर मौसम सूखा रहता है। ऐसे में शीशम की लकड़ी चुनना बेस्ट ऑप्शन है। शीशम सूखे मौसम में क्रैक नहीं होता है और इसकी मजबूती सालों साल बनी रहती है। शीशम की हार्डनेस के कारण रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले फर्नीचर के लिए बेस्ट माना जाता है। आप ऑप्शन के तौर पर सागौन भी चुन सकते हैं।
भारत के ठंडे राज्य जैसे कि कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड आदि में विभिन्न प्रकार की लड़कियों का इस्तेमाल किया जाता है। यहां पर अखरोट की लकड़ी, देवदार की लकड़ी, चीड़ की लकड़ी और विलो की लकड़ी से फर्नीचर और पारंपरिक आइटम्स बनाये जाते हैं। कश्मीर में अलमारी, दरवाजे और बेड फ्रेम में देवदार की लकड़ी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। वहीं अखरोट की लकड़ी से फर्नीचर बनाना मजबूत टिकाऊ माना जाता है।
और पढ़ें: Sweater Storage Hacks: इन 5 स्मार्ट तरीकों से करें वूलेन कपड़ों को स्टोर