82 की उम्र में पिता बना शख्स, 50 साल छोटी बीवी ने दिया बच्चे को जन्म, जानें कैसे हुआ 'चमत्कार'

Published : Jun 25, 2022, 10:03 AM ISTUpdated : Jul 02, 2022, 02:39 PM IST
82 की उम्र में पिता बना शख्स, 50 साल छोटी बीवी ने दिया बच्चे को जन्म, जानें कैसे हुआ 'चमत्कार'

सार

82 साल की उम्र में कोई शख्स पिता बन सकता है। सोचकर हैरान होंगे ना। लेकिन लंदन में रहने वाले न्यूट्रिशन एक्सपर्ट अल्बर्टो कॉर्मिलोट इस उम्र में पिता बने हैं। उन्होंने अपने से 50 साल छोटी लड़की से शादी की थी। यानी 30 साल की लड़की उनके बच्चे की मां बनी हैं।

लाइफस्टाइल डेस्क. कहते हैं प्यार करने की कोई उम्र नहीं होती है। लेकिन बच्चा पैदा करने की उम्र जरूर होती है। लेकिन लंदन के 82 साल के शख्स ने बच्चा पैदा करने की उम्र को भी पीछे छोड़ दिया। जी हां, लंदन के न्यूट्रिशन एक्सपर्ट अल्बर्टो कॉर्मिलोट 82 की उम्र में पिता बने हैं। इसके लिए उन्होंने फर्टीलिटी ट्रीटमेंट का सहारा लिया। अल्बर्टो खुद से 50 साल छोटी लड़की से शादी की है। अल्बर्टो इस उम्र में पिता बने हैं लेकिन उन्हें डर सता रहा है कि वो बच्चे को बड़ा होते हुए नहीं देख पाएंगे। 

बेटा जब बड़ा हो तो अपने पिता को ना भूले इसके लिए वो यादें संजो रहे हैं। उनका बेटा अब एक साल का हो गया है। ऐसे में वो अपने बच्चे के साथ ही वक्त गुजार रहे हैं। इसके साथ वो वीडियो और ऑडियो में खुद के संदेश रिकॉर्डिंग करके जमा कर रहे हैं। ताकि जब वो बड़ा तो उसे सुने और देखें। 

बच्चे के भविष्य के लिए अल्बर्टो कर रहे हैं ये काम

मीडिया रिपोर्ट्स से बातचीत में अल्बर्टो कॉर्मिलोट  ने कहा कि मुझे पता है कि जीवन की डोर लंबी नहीं है। मेरा छोटा बेटा मेरे पास है लेकिन जबतक रहूंगा उसके साथ ही रहूंगा। मैं हर दिन उसके साथ खूब मस्ती के सा जिंदगी जिउंगा और ऐसी प्लानिंग कर रहा हूं कि ताकि हमारी जिंदगी खुशनुमा रहें।

पहली पत्नी की कैंसर से हुई थी मौत

ऐसा नहीं है कि अल्बर्टो का यह पहला बच्चा है। इससे पहले उनकी दो बेटे और तीन बेटियां हैं। जो उनकी पहली पत्नी मोनिका अर्बोर्गस्ट से हुई हैं। पेट के कैंसर से उनकी पत्नी का निधन साल 2017 में हो गया था। इसके बाद उन्होंने कम उम्र की महिला से शादी की।

क्या है फर्टिलिटी ट्रीटमेंट

अल्बर्टो इस उम्र में पिता बनने के लिए फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का सहारा लिए। इस ट्रीटमेंट का इस्तेमाल स्पर्म में कोई असामान्यता होने या फिर कंसीव होने में दिक्कत के बाद की जाती है। स्पर्म को ICSI ट्रीटमेंट के दौरान एग के बीच में यानी साइटोप्लाज्मा में सीधा इंजेक्ट किया जाता है।  फर्टिलाइजेशन के बाद एम्ब्रायो को 1 से 5 दिन तक बढ़ने दिया जाता है। इसके बाद फीमेल के यूट्रस में डाल दिया जाता है। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, लिबिडो, स्पर्म काउंट में कमी , खराब स्पर्म मॉटिलिटी, टेस्टोस्टेरोन लेवल में कमी की वजह से मेल फर्टिलिटी पर असर पड़ता है। लेकिन बढ़ती उम्र में भी अगर पुरुष का स्पर्म गुड क्वालिटी और काउंट का होता है तो फिर वो अपने पार्टनर को प्रेग्नेंट कर सकता है।

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