मानसून में घर की ये 5 जगहें बन जाती हैं फफूंदी का अड्डा, कहीं आपका घर भी तो नहीं?

Published : Jul 08, 2026, 08:30 AM IST

Monsoon home care: मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी के कारण घर के कुछ हिस्सों में सबसे पहले फफूंदी लगने लगती है। इस लेख में जानिए घर की 7 ऐसी जगहों के बारे में जहां फंगस तेजी से पनपती है, साथ ही आसान और असरदार बचाव के तरीके भी।

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मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं घर में सीलन और फफूंदी की समस्या भी बढ़ा देता है। हवा में नमी बढ़ने के कारण घर के कई हिस्सों में फंगस तेजी से पनपने लगती है, जिससे न सिर्फ दीवारें और फर्नीचर खराब होते हैं बल्कि स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है। फफूंदी के कारण एलर्जी, सांस लेने में परेशानी और बदबू जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। अगर समय रहते इन जगहों की देखभाल की जाए, तो फफूंदी को आसानी से रोका जा सकता है। आइए जानते हैं घर की उन 7 जगहों के बारे में, जहां मानसून में सबसे पहले फफूंदी लगने का खतरा रहता है।

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बाथरूम की दीवारें और टाइल्स

बाथरूम में लगातार नमी बनी रहती है, इसलिए यहां फफूंदी सबसे जल्दी दिखाई देती है। खासकर टाइल्स के जोड़, कोनों और शॉवर एरिया में काले धब्बे बनने लगते हैं। नियमित सफाई करें और एग्जॉस्ट फैन या खिड़की खोलकर नमी बाहर निकलने दें। सप्ताह में एक बार एंटी-फंगल क्लीनर या सिरके के घोल से सफाई करने पर फफूंदी बनने की संभावना काफी कम हो जाती है। नहाने के बाद फर्श और दीवारों पर जमा अतिरिक्त पानी को वाइपर से हटाने की आदत भी फायदेमंद रहती है।

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किचन सिंक के नीचे की कैबिनेट

सिंक के नीचे अक्सर पानी का रिसाव या नमी जमा हो जाती है, जिससे लकड़ी की कैबिनेट में फफूंदी लग सकती है। समय-समय पर इस हिस्से की जांच करें और किसी भी तरह के लीकेज को तुरंत ठीक करवाएं। कैबिनेट के अंदर अखबार या नमी सोखने वाले पैड रखने से अतिरिक्त नमी कम होती है। साथ ही सफाई करते समय इस हिस्से को पूरी तरह सूखा रखने की कोशिश करें।

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अलमारी और कपड़ों का स्टोरेज

बंद अलमारी में हवा का आना-जाना कम होने से कपड़ों और लकड़ी की सतह पर सीलन जम जाती है। अलमारी को बीच-बीच में खोलकर रखें, कपड़ों को पूरी तरह सूखा होने के बाद ही रखें और नमी सोखने वाले उत्पादों का इस्तेमाल करें। अगर लंबे समय तक अलमारी बंद रहती है, तो उसमें हल्की बदबू और फंगस भी विकसित हो सकती है। महीने में एक-दो बार धूप लगने पर कपड़ों और बिस्तरों को बाहर निकालकर सुखाना भी अच्छा उपाय है।

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खिड़कियों के आसपास का हिस्सा

बारिश का पानी और संघनन (कंडेन्सेशन) खिड़की के फ्रेम और किनारों पर नमी पैदा करता है। यदि यहां लंबे समय तक पानी जमा रहे, तो फफूंदी बनने लगती है। खिड़कियों को सूखे कपड़े से पोंछें और रबर सील की नियमित जांच करें। अगर खिड़की की सील खराब हो गई है, तो उसे समय रहते बदलवा दें ताकि बारिश का पानी अंदर न आए। दिन में कुछ समय खिड़कियां खोलने से कमरे में ताजी हवा आती है और नमी कम होती है।

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दीवारों के कोने और छत

अगर दीवारों में सीलन या छत से पानी का रिसाव है, तो कोनों में काले या हरे धब्बे दिखाई देने लगते हैं। ऐसे संकेत दिखते ही समस्या की वजह पता करें और वॉटरप्रूफिंग या मरम्मत कराने में देर न करें। फफूंदी को केवल पेंट से ढक देना स्थायी समाधान नहीं होता, इसलिए पहले रिसाव की समस्या दूर करना जरूरी है। समय पर मरम्मत कराने से दीवारें लंबे समय तक सुरक्षित रहती हैं और घर का लुक भी बना रहता है।

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