
लाइफस्टाइल डेस्क. दक्षिण भारत रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मनाया जाता है। हालांकि बदलते दौर में वहां इस त्योहार के प्रति लोगों में आकर्षण बनने लगा है और कई घरों में यह मनाया भी जाने लगा है। लेकिन वहां पर सावन के पूर्णिमा के दिन नारियण पूर्णिमा का त्योहार मनाने हैं। जोकि भाई-बहन के त्योहार से अलग होता है। लेकिन कर्नाटक में एक ऐसा त्योहार मनाया जाता है जो भाई-बहन के लिए होता है। सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी को जहां उत्तर भारत में नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। ठीक वैसे ही कर्नाटक में सांप को जोड़कर भाई की सुरक्षा के लिए यह पर्व मनाया जाता है।
भाई के पीठ पर दूध से भीगी मिट्टी लगाती हैं बहनें
कर्नाटक में सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बहनें सांप की मूर्ति या जहां वो रहता है उसके पास दूध की धारा चढ़ाती हैं। इसके बाद दूध से भीगी मिट्टी घर लाकर भाई की पीठ पर लगाती है। ऐसा कहा जाता है कि इससे भाई के जीवन के सारे कष्ट को नाग देवता दूर कर देते हैं और लंबी उम्र प्रदान करते हैं। बहनें पारंपरिक गीत गाकर पूजा करती हैं।
नाग देवता ने भाई को दिया जीवनदान
इस त्योहार के पीछे एक कहानी है। पहली कहानी कुछ ऐसी है-एक बार एक लड़की अपने भाई से नाग पूजा के लिए कुछ फूल लाने के लिए कहा। जो भाई फूल लाने गया उसे सांप ने काट लिया और उसकी मृत्यु हो गई। बहन तब नाग देवता से प्रार्थन करती है। जिससे वो उसके भाई को जिंदा कर देते है। उस दिन को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है।
रक्षाबंधन के दिन साउथ में मनाया जाता है नारियल पूर्णिमा
वहीं, रक्षा बंधन के दिन दक्षिण भारत के समुद्री क्षेत्रों में लोग इस दिन नारियल पूर्णिमा का त्योहार मनाते हैं। यह मछुआरों का त्योहार होता है। इसी दिन से मछुआरे मछली पकड़ने की शुरुआत करते हैं। इस दिन भगवान इंद्र और वरुण देवता की पूजा की जाती है।
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