
लाइफस्टाइल डेस्क। कोरोनावायरस महामारी के दौरान यह देखने में आया है कि काफी लोग डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। इनमें हर उम्र के लोग शामिल हैं। पुरुषों के साथ महिलाएं भी इस समस्या की चपेट में आ रही हैं। ज्यादातर लोगों के मन में कोरोना महामारी का डर बैठ गया है। उन्हें लगता है कि वे उनकी फैमिली के लोगों को यह बीमारी हो सकती है। वहीं, काफी लोग जॉब छूट जाने या रोजगार बंद हो जाने से परेशान हैं। उन्हें दूसरा कोई ऑप्शन नहीं मिल रहा है। महिलाएं भी घरेलू समस्याओं, रुपए-पैसों की दिक्कत और असुरक्षित भविष्य की आशंका से चिंतित रहने लगी हैं। यही चिंता आगे चल कर डिप्रेशन का रूप ले लेती है।
1. पार्टनर को इग्नोर मत करें
अगर आपका पार्टनर चिंतित और उदास नजर आता हो तो उसे इग्नोर मत करें। उससे बातचीत करने की कोशिश करें। अक्सर डिप्रेशन के शिकार लोग किसी से भी ज्यादा बातचीत करने से कतराते हैं। लेकिन फिर भी कोशिश मत छोड़ें। किसी ऐसे टॉपिक पर बात करें, जिससे पार्टनर को खुशी हो। हंसी-मजाक की बात कर सकते हैं। इसके बाद देखें कि रिस्पॉन्स कैसा रहता है।
2. साथ घूमने निकलें
डिप्रेशन का शिकार व्यक्ति अगर दिन-रात घर में ही रहता है तो इससे उसकी समस्या बढ़ती चली जाती है। अक्सर डिप्रेशन से जूझ रहे लोग एक जगह ही बैठे रहना चाहते हैं। वे ज्यादा मूवमेंट नहीं करते। लेकिन यह कोशिश करें कि उन्हें कम से कम सुबह-शाम किसी पार्क में वॉक के लिए ले जाएं। सुबह-शाम घूमने से शरीर के साथ मन पर भी अच्छा असर पड़ता है।
3. चिंता करने को नहीं कहें
अगर आपके पार्टनर की जॉब चली गई है या रोजगार में नुकसान हुआ है तो समझाने की कोशिश करें कि यह सब ठीक हो जाएगा। रोजगार की समस्या हमेशा के लिए नहीं बनी रहेगी। पार्टनर के दिलासा देने पर दूसरों के मुकाबले ज्यादा बेहतर असर होता है। अक्सर लोग रोजगार जाने पर पार्टनर के सामने हीन भावना के शिकार हो जाते हैं और उनके मन में यह डर भी पैदा हो जाता है कि पार्टनर उन्हें कहीं ताने न दे।
4. बेहतर खान-पान का रखें ख्याल
डिप्रेशन के मरीज को भूख कम लगती है। दूसरी एक्टिविटीज के साथ खाने-पीने में भी उसकी रुचि कम हो जाती है। उसे ठीक से नींद भी नहीं आती। इसके साथ ही यौन संबंध बनाने में भी उसका कोई इंटरेस्ट नहीं रह जाता। ये समस्याएं तो अपनी जगह हैं, लेकिन अगर खान-पान ठीक नहीं रहे तो कमजोरी बढ़ेगी, जिससे डिप्रेशन की समस्या और भी गंभीर हो सकती है। इसलिए जैसे भी हो, पार्टनर को सही समय पर पौष्टिक भोजन जरूर दें।
5. मनोचिकित्सक से लें सलाह
इस बात को समझना जरूरी है कि डिप्रेशन की समस्या कैसी है। मामूली डिप्रेशन समय के साथ अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन अगर यह समस्या गंभीर हो तो मनोचिकित्सक की सलाह लेना जरूरी हो जाता है। मनोचिकित्सक से सलाह लेने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। कई बार काउंसिलिंग से भी समस्या का निदान हो जाता है। डिप्रेशन की गंभीर अवस्था में दवा लेनी पड़ती है। अब ऐसी दवाइयां आ गई हैं, जिनसे डिप्रेशन को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
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