
Brahmacharya Rules: गृहस्थ जीवन में ब्रह्मचर्य का पालन करना आसान नहीं होता। यदि पति धार्मिक प्रवृत्ति का हो तो उसे पत्नी का ध्यान रखने में कठिनाई होती है, और अगर पत्नी भगवत मार्ग पर हो तो उसे पति की इच्छाओं को पूरा करने में परेशानी आती है। फिर भी, शादीशुदा जीवन में संबंध बनाना जरूरी माना गया है। धर्म के अनुसार, संबंध बनाने का उद्देश्य संतान उत्पत्ति है। लेकिन आज के समय में कई पुरुष इसे आनंद के लिए भी बार-बार करते हैं। सवाल यह है कि क्या ऐसा करना उचित है? इस पर वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Ji Maharaj) ने जवाब दिया है। आइए जानते हैं, उन्होंने बताया कि महीने में पत्नी के साथ कितनी बार समागम यानी संबंध बनाना सही हो सकता है।
प्रेमानंद जी महाराज का उत्तर- मासिक धर्म के आठ दिन बाद केवल एक बार संबंध बनाना चाहिए, यही शास्त्र सम्मत पद्धति है। उन्होंने इसे लेकर एक कहानी सुनाई। एक बार एक शिष्य ने अपने गुरुजी से पूछा कि हमारा विवाह हो गया है, अब जीवन कैसे चलेगा?
गुरुजी ने उत्तर दिया, ‘वर्ष में एक बार संबंध बनाओ।’
शिष्य ने कहा, 'ऐसा तो संभव नहीं है।'
फिर गुरुजी बोले, 'छह महीने में एक बार।'
शिष्य ने कहा, 'यह भी मुश्किल है।'
तब गुरुजी ने शास्त्र की पद्धति बताई, महीने में एक बार संबंध बनाना उचित है।'
प्रेमानंद जी ने आगे कहा, 'आज के समय में लोग महीने में पांच या आठ बार संबंध बनाते हैं, फिर भी जीवित हैं , यही बड़ी बात है। एक मन (लगभग 40 किलो) अन्न, पानी और दूध जैसे पदार्थ जब शरीर में पचते हैं, तब जाकर एक बार संतान उत्पत्ति के योग्य वीर्य (स्पर्म) बनता है। जो लोग इसे बार-बार नष्ट करते हैं, उनकी जीवनी शक्ति कमजोर हो जाती है। इसलिए वही गृहस्थ ब्रह्मचारी कहलाता है जो एक पत्नीव्रती हो और महीने में एक बार ही संतान उत्पत्ति के उद्देश्य से संबंध बनाएं, यही शास्त्र में कहा गया है।'
प्रेमानंद जी महाराज का उत्तर- फिर भी व्याभिचार के लिए आज्ञा नहीं है। शास्त्रों में इसकी अनुमति नहीं दी गई है। हालांकि यदि कोई पति-पत्नी महीने में एक बार संबंध बनाते हैं, भले ही संतान उत्पत्ति का विचार न हो, तो भी उसे पाप नहीं लगता।
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प्रेमानंद जी महाराज राधा रानी और कृष्ण के भक्त हैं। वे उनपर अटूट विश्वास करते हैं। उनका कहना है कि नाम जप से जीवन को भगवत मार्ग पर ले जाया जा सकता है। वे अबतक अपने प्रवचन से लाखों युवाओं को बदल दिया है। लोग उन्हें सुनकर खराब आदतों को छोड़ देते हैं और राधा नाम से खुद को जोड़ लेते हैं।
प्रेमानंद जी को किडनी की बीमारी है। उनके दोनों किडनी पिछले 20 साल से फेल है। वो डालिसिस पर चल रहे हैं। लेकिन उनका कहना है कि राधा रानी उन्हें चल रही हैं। जब वक्त पूरा हो जाएगा वो बुला लेंगी।
प्रेमानंद महाराज वृंदावन में है, जहां वे श्री राधाकेली कुंज आश्रम में रहते हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर के पास आखरी गांव में हुआ था, लेकिन उन्होंने 13 साल की उम्र में अपना घर छोड़ दिया था।
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