
नई दिल्ली. कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन पिछले 9 महीने से जारी है। हालांकि, कोरोना के चलते यह आंदोलन काफी बेअसर नजर आ रहा है। ऐसे में किसान संगठनों ने एक बार फिर इसे धार देने की कोशिश की है। इसी के तहत किसानों ने 26 मई को 'काला दिवस' मनाने का फैसला किया है। इस काले दिवस को कांग्रेस, शिवसेना समेत 12 दलों ने समर्थन दिया है।
जिन नेताओं ने किसान संगठनों के काले दिवस को समर्थन दिया है, उनमें सोनिया गांधी, ममता बनर्जी , शरद पवार, उद्धव ठाकरे, एमके स्टालिन, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, डी राजा, सीताराम येचुरी, एचडी देवेगौड़ा, फारूख अब्दुल्ला, हेमंत सोरेन शामिल हैं। विपक्षी नेताओं ने सरकार से किसानों से बात करने की अपील की है।
क्या कहा पार्टियों ने ?
किसान आंदोलन के समर्थन में विपक्षियों पार्टियों ने साझा बयान जारी किया है। विपक्षी पार्टियों की ओर से कहा गया है कि संयुक्त मोर्चा ने 26 मई को शांतिपूर्ण किसान आंदोलन के 6 महीने पूरे होने पर विरोध प्रदर्शन रखा है। हम संयुक्त किसान मोर्चा के विरोध प्रदर्शन को समर्थन देते हैं।
इससे पहले 12 मई को हमने पीएम मोदी को पत्र लिखा था। इसमें हमने कहा था कि कृषि कानूनों को वापस लिया जाए, यह महामारी में लाखों किसानों को पीड़ित बना रहा है। इन्हें वापस लिया जाए, ताकि किसान अनाज उगा कर भारत के लोगों का पेट भर सकें।
कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहा आंदोलन
भारत में कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए केंद्र सरकार पिछले साल सितंबर में तीन नए कानून लाई थी। इन कानूनों को लेकर पिछले 9 महीने से ज्यादा समय से कुछ किसान संगठन राजधानी दिल्ली के आस पास डेरा डाले हुए हैं और इसके विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। वहीं, कृषि कानूनों को लेकर विरोध कर रहे किसानों और सरकार के बीच 12 दौर की बातचीत हो चुकी है। हालांकि, अभी कोई नतीजा नहीं निकला है।
कौन से तीन कानून सरकार ने पास किए
1- 'कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020
2- कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत अश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक
3 आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक, 2020
यूजर्स ने उठाए विपक्ष पर सवाल
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