
नई दिल्ली. कोरोना के खिलाफ लड़ाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर लोगों ने रविवार को रात 9 बजे घर की लाइट बंद कर बालकनी, छत पर दीये, मोमबत्ती और फ्लैशलाइट जलाईं। इस दौरान इलेक्ट्रिक ग्रिड को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचा। दरअसल, सोशल मीडिया पर ऐसी अफवाहें थीं और विपक्ष के कुछ नेताओं ने सवाल उठाए थे कि अचानक लाइट बंद करने से ग्रिड ठप हो जाएंगी।
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि जब लोग अचानक से लाइट बंद करेंगे तो लाइट की डिमांड कम हो जाएगी, ऐसे में ग्रिड फेल हो सकते हैं। हालांकि, ऊर्जा मंत्रालय ने इन दावों को खारिज कर दिया। हालांकि, इस दौरान खुद केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह खुद मोर्चा संभाले रहे।
32000 MW कम हुई डिमांड
आरके सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा, आज 9 मिनट लाइट बंद होने के बाद डिमांड 32000 मेगा वॉट कम हुई। मंत्रालय को उम्मीद थी कि यह 12 हजार तक कम होगी। इस सबके बावजूद भी ग्रिड फेल की कोई खबर नहीं आई है। आरके सिंह ने अपने मंत्रालय के अफसरों और इंजीनियरों को बधाई दी।
लाइटें बंद होने पर भी 110 मेगावाट की रैंप अप सुचारू रही
मंत्री के अनुसार करीब चार-पांच मिनट के दौरान बिजली खपत 1,17,000 मेगावाट से कम होकर 85,300 मेगावाट रही। यह संभावित 12,0000 मेगावाट की कमी से कहीं अधिक थी। मंत्रालय के अनुसार लाइट बंद होने के बाद मांग में कमी के पश्चात 110 मेगावाट की बढ़ोत्तरी (रैंप अप) सुचारू रही। कहीं से भी बिजली में गड़बड़ी या बंद होने की घटना नहीं हुई। उन्होंने बिजली उत्पादन कंपनियों एनटीपीसी और एनएचपीसी की सराहना की।
सिंह ने कहा कि पनबिजली क्षेत्र से अच्छा योगदान मिला। ऐसी आशंका जतायी गयी थी कि प्रधानमंत्री की अपील पर रात नौ बजे से नौ मिनट तक घरों में बल्ब, ट्यूबलाइट बंद होने से बिजल ग्रिड पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और बिजली व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। हालांकि मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा कि था कि देश की ग्रिड व्यवस्था मजबूत है और इस प्रकार की आशंकाएं निराधार हैं।
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