नई दिल्ली। भारत सरकार के CCS (cabinet committee on security) ने पांचवी पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट बनाने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इससे आने वाले सालों में स्वदेशी स्टील्थ फाइटर जेट बनाने का रास्ता खुला है।
5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट की बात करें ऐसे विमान सिर्फ अमेरिका और रूस के पास हैं। भारत लड़ाकू विमान तैयार करने में मामले में पीछे है।
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तेजस भारत का पहला स्वदेशी लड़ाकू विमान है। फाइटर जेट बनाने के लिए बेहद आधुनिक टेक्नोलॉजी की जरूरत होती है। इस मामले में भारत पीछे है।
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लड़ाकू विमानों के मामले में भारत के पीछे होने की मुख्य वजहों में से एक इस क्षेत्र में देर से शुरुआत और जरूरी टेक्निकल जानकारी की कमी है।
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भारत को अपने तेजस विमान के लिए दूसरे देश से इंजन लेना पड़ता है। फाइटर जेट्स के मामले में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस जैसे देश आगे हैं। चीन ने भी इस मामले में तेजी से काम किया है।
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अमेरिका के पास F/A-22 रैप्टर और F-35 दो तरह के 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट हैं। अमेरिकी सेना के पास सबसे अधिक स्टील्थ फाइटर जेट हैं।
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F/A-22 रैप्टर दो इंजन वाला स्टील्थ फाइटर जेट है। अमेरिका अपने इस लड़ाकू विमान को किसी दूसरे देश को नहीं देता।
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F-35 एक इंजन वाला फाइटर जेट है। इसके कई वेरिएंट है। अमेरिका इसे अपने करीबी सहयोगी देशों को बेचता है।
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रूस ने सुखोई-57 नाम का स्टील्थ फाइटर जेट बनाया है। इसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ लड़ाई में किया गया है।
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चीन का दावा है कि उसने चेंगदू J-20 माइटी ड्रैगन नाम का स्टील्थ फाइटर जेट बनाया है। हालांकि उसकी स्टील्थ की क्षमता को लेकर सवाल हैं।
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