
तिरुवनंतपुरम। सेम सेक्स मैरिज (same sex marriage) पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है। केंद्र सरकार ने इसका विरोध किया है। सामाजिक कार्यकर्ता राहुल इस्वर ने केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विवाह की संस्था "सांस्कृतिक संघ" है। समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की याचिका का विरोध कर केंद्र सरकार ने सही रुख अपनाया है।
राहुल इस्वर ने कहा कि शादी सदियों से एक पवित्र संस्था है। केंद्र सरकार ने इसपर सही फैसला लिया है। विवाह के बारे में कोई फैसला करते वक्त हमें बहुत अधिक विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है। सभी सहमत हैं कि किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
परिवार से नहीं हो सकती समलैंगिक विवाह की तुलना
दरअसल, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग वाली याचिका का विरोध किया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि समान लिंग वाले व्यक्तियों द्वारा एक साथ रहना अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। इसकी तुलना परिवार इकाई के साथ नहीं की जा सकती। केंद्र ने कहा कि समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने वाली याचिकाओं को खारिज किया जाना चाहिए। इसपर राहुल इस्वर ने कहा, "मेरा मानना है कि केंद्र सरकार ने सही स्टैंड लिया है।
पश्चिम में लिए गए फैसलों को आयात नहीं कर सकते
सरकार ने कहा कि समलैंगिक संबंध और विषमलैंगिक संबंध स्पष्ट रूप से अलग-अलग वर्ग हैं। इन्हें एक जैसा नहीं माना जा सकता है। भारतीय लोकाचार के आधार पर इस तरह की सामाजिक नैतिकता और सार्वजनिक स्वीकृति पर फैसला करना विधायिका का काम है। पश्चिमी देशों में समलैंगिक विवाह को लेकर लिए गए फैसलों को भारत में आयात नहीं किया जा सकता।
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