
रायपुर. नक्सलियों ने 3 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के बीजापुर में हुई मुठभेड़ के दौरान अगवा किए गए जवान को रिहा कर दिया है। समाचार एजेंसी एएनआई ने पुलिस सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। बीजापुर में हुई मुठभेड़ में 24 जवान शहीद हो गए थे। वहीं, 1 जवान को नक्सलियों ने बंधक बना लिया था। इतना ही नहीं नक्सलियों ने जवान की तस्वीर भी जारी की थी।
नक्सलियों के चुंगल से आजाद होने के बाद जवान की पहली तस्वीर।
दरअसल, छत्तीसगढ़ के बीजापुर में हुई मुठभेड़ के बाद से कॉन्स्टेबल राकेश्वर सिंह मन्हास लापता थे। हालांकि, मुठभेड़ के अगले दिन नक्सलियों ने एक स्थानीय पत्रकार को फोन कर जानकारी दी थी, कि लापता जवान उनके कब्जे में है। इतना ही नहीं नक्सलियों ने राकेश्वर सिंह फोटो जारी कर बताया था कि जवान बिल्कुल ठीक है।
नक्सलियों ने कहा था- वे बातचीत के लिए तैयार
बताया जा रहा है कि कोबरा जवान को तर्रेम में 168 वीं बटालियन के कैंप में रखा गया है। यहां उनका मेडिकल चेकअप किया जा रहा है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हुआ है कि उन्हें कैसे रिहा किया गया है।
इतना ही नहीं नक्सलियों ने पत्र में कहा था कि वे सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं। सरकार पहले मध्यस्थ का नाम घोषित करे, इसके बाद वे अगवा जवान को छोड़ देंगे।
खबर पाते ही परिवार वालों ने मनाया जश्न
राजेश्वर सिंह की पत्नी मीनू ने कहा, आज मेरे लिए जीवन में सबसे खुशी का दिन है। मुझे हमेशा उनके लौटने की उम्मीद थी। मैं सरकार को धन्यवाद कहती हूं।
जवान की पत्नी ने पीएम मोदी से की थी खास अपील
राकेश्वर सिंह जम्मू कश्मीर के रहने वाले हैं। सीआरपीएफ के अफसरों को जम्मू में राकेश्वर सिंह के घर भेजकर उनके परिजनों से मुलाकात की थी। इस दौरान जवान की पत्नी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील की है कि उनके पति को सुरक्षित खोजा जाए। उन्होंने पीएम से अपील की है कि जैसे अभिनंदन वर्धमान को पाकिस्तान वापस लाए थे, वैसे ही मेरे पति को भी ला दो।
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