
Aero India 2025: रूस और अमेरिका के बीच भारत को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बेचने की होड़ लगी है। यही वजह है कि दोनों देश बेंगलुरु में लगे Aero India 2025 में अपने खास फाइटर जेट लेकर आए हैं। रूस की ओर से Su-57 और अमेरिका की ओर से F-35 लाया गया है। दोनों स्टील्थ फाइटर जेट हैं।
Su-57 ने पहली बार भारत के आसमान में उड़ान भरी है। रूस द्वारा इसका एक्सपोर्ट वर्जन Su-57E भारत को ऑफर किया गया है। Su-57 बनाने वाली कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने प्रत्यक्ष खरीद और संयुक्त उत्पादन दोनों विकल्पों की पेशकश की है। बता दें कि पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने के लिए भारत ने 2000 की शुरुआत में रूस के साथ साझेदारी की थी। हालांकि, कुछ परेशानी आने पर 2018 में भारत इससे पीछे हट गया। भारत ने अपने AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) प्रोजेक्ट पर फोकस किया।
दूसरी ओर अमेरिका भारत को F-35 बेचने की कोशिश में है। कहा जा रहा है कि एडवांस स्टेल्थ टेक्नोलॉजी और पश्चिमी देशों के हथियारों के साथ एकीकरण के कारण F-35 भारतीय वायु सेना के लिए गेम-चेंजर होगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ रक्षा संबंधों को गहरा करने पर ध्यान दे रहे हैं। उनकी कोशिश है कि भारत ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी हथियार खरीदे। हालांकि अमेरिका की ओर से F-35 के संयुक्त उत्पादन जैसे ऑफर नहीं मिले हैं।
भारत का ध्यान अपना लड़ाकू विमान AMCA विकसित करने पर है, लेकिन टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग संबंधी चुनौतियों के कारण इसमें प्रगति धीमी रही है। सरकार ने 6 प्रोटोटाइप के निर्माण को मंजूरी दी है। इनमें से पहला अगले पांच साल में बनने की उम्मीद है।
भारत के लिए खुद के लड़ाकू विमान बनाने के लिए सबसे बड़ी चुनौती इंजन की कमी है। भारत के पास इस वक्त लड़ाकू विमान का इंजन बनाने की क्षमता नहीं है। Tejas Mark II प्रोग्राम के लिए इंजन विकास करने में देरी हो रही है। इसके चलते संदेह है कि 2035 से पहले AMCA बन पाएंगे। इस वजह से भारत को अंतरिम समाधान के रूप में दूसरे देश से एडवांस फाइटर जेट खरीदने की जरूरत हो सकती है।
रूस और अमेरिका दोनों से भारत के अच्छे रक्षा संबंध हैं। दोनों देशों से भारत ने बहुत से हथियार खरीदे हैं। भारत ने सबसे ज्यादा हथियार रूस से लिए हैं। भारत की मिलिट्री हार्डवेयर का 60-70% रूस से जुड़ा है। रूस ने भारत के साथ कई प्रोजेक्ट्स में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर किया है। इसे ब्रह्मोस मिसाइल, AK-203 राइफल और Su-30MKI लड़ाकू विमान के मामले में देखा जा सकता है। Su-57E को एक अन्य प्रमुख सहयोग के रूप में पेश किया जा रहा है। इसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की संभावना भी है। दूसरी ओर अमेरिका से F-35 विमान के संयुक्त उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसा कोई ऑफर नहीं है।
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