
लखनऊ. अयोध्या में जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर रविवार को लखनऊ में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मीटिंग हुई। इस बैठक के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कई अंतर्विरोध है। इसलिए हमने फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का फैसला किया है।
दूसरी जगह मस्जिद नहीं बना सकते
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि जहां एक बार मस्जिद बन जाता है वहां हम मस्जिद ही मानते हैं। शरियत में मस्जिद के लिए दूसरी जगह पर जमीन नहीं ली जा सकती। इसलिए हम पांच एकड़ की पेशकश को भी ठुकराते हैं। मस्जिद की जमीन के बदले में मुसलमान कोई अन्य जमीन कबूल नहीं कर सकते। फैसले में कई अंतर्विरोध, जब बाहर से लाकर मूर्ति रखी गई तो उन्हें देवता कैसे मान लिया गया।
पर्सनल लॉ बोर्ड की प्रेस कॉन्फ्रेंस की बड़ी बातें
- 'बाबरी मस्जिद में आखिरी नमाज 16 सितंबर 1949 को पढ़ी गई थी, सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को माना है।'
- 'गुंबद के नीचे जन्मभूमि का प्रमाण नहीं मिला है, इस बात को भी सुप्रीम कोर्ट ने माना था।'
- '1949 में मस्जिद में मूर्ति रखे जाने को सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी बताया है।'
- 'सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को भी माना कि मस्जिद को किसी मंदिर को तोड़कर नहीं बनाया गया था।'
- 'सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ASI की रिपोर्ट से यह साबित नहीं हो पाया कि मस्जिद का निर्माण किसी मंदिर को तोड़कर किया गया था।'
- 'फैसले में कई अंतर्विरोध, जब बाहर से लाकर मूर्ति रखी गई तो उन्हें देवता कैसे मान लिया गया।'
- 'मस्जिद के लिए दूसरी जगह जमीन स्वीकार नहीं करेगा मुस्लिम पक्ष।'
- 'मस्जिद की जमीन के बदले में मुसलमान कोई अन्य जमीन कबूल नहीं कर सकते।'
- 'हम अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे।'
'याचिका दायर करना हमारा अधिकार'
इससे पहले जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के मौलाना अरशद मदनी ने AIMPLB की बैठक के बाद अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा- यह जानते हुए भी कि हमारी पुनर्विचार याचिका 100% खारिज कर दी जाएगी, हमें याचिका दायर करनी चाहिए। यह हमारा अधिकार है।
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