
राजकोट (गुजरात) [भारत], 8 जुलाई (एएनआई): केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने बुधवार को राजकोट एयरपोर्ट पर वार्षिक एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज (AHME) का आयोजन किया। एक विज्ञप्ति में कहा गया कि इसका उद्देश्य विमान अपहरण जैसी नकली स्थिति से निपटने में विभिन्न एजेंसियों की तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमताओं का आकलन करना था।
इस अभ्यास की अध्यक्षता राजकोट के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, चैतन्य मांडलिक ने की। इसमें सीआईएसएफ, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), जिला प्रशासन, खुफिया ब्यूरो, एयरलाइंस, विमानन हितधारकों और अन्य एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मियों ने हिस्सा लिया।
सीआईएसएफ के अनुसार, ये मॉक ड्रिल ऑपरेशनल तैयारी को मजबूत करती हैं, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को बढ़ाती हैं, और विमानन सुरक्षा की उभरती चुनौतियों से निपटने की तैयारी को पुख्ता करती हैं।
इससे पहले जून में, चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी एक एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज (AHME) सफलतापूर्वक आयोजित की गई थी। इसका मकसद कई सुरक्षा और नागरिक उड्डयन एजेंसियों की ऑपरेशनल तैयारी और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं का मूल्यांकन और उन्हें मजबूत करना था।
सीआईएसएफ द्वारा पहले जारी एक बयान के अनुसार, यह हाई-प्रोफाइल सुरक्षा ड्रिल तमिलनाडु सरकार की संयुक्त गृह सचिव, जे ऐनी मैरी स्वर्णा की देखरेख में और डीआईजी/सीएएसओ, आर पोन्नी के साथ-साथ अन्य हितधारक विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित की गई थी।
इस व्यापक अभ्यास में विमान पर कब्जे के एक बेहद यथार्थवादी परिदृश्य का अनुकरण किया गया, जिसमें जमीनी स्तर पर जटिल परिचालन स्थितियों को सटीक रूप से फिर से बनाने के लिए एक यात्री बस का उपयोग किया गया।
इसमें आगे कहा गया कि इस तरह के संयुक्त सैन्य-नागरिक अभ्यास अपहरण के खतरों के खिलाफ प्रोटोकॉल को मजबूत करने, तत्काल परिचालन प्रतिक्रिया क्षमताओं को तेज करने और यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि सभी सुरक्षा तंत्र उभरती वैश्विक विमानन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम कर सकें। (एएनआई)
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