अयोध्या पर फैसले से पहले मुस्लिम आर्कियोलॉजिस्ट का दावा, बाबरी के पहले वहां राम मंदिर था

Published : Oct 01, 2019, 07:06 PM ISTUpdated : Oct 16, 2019, 08:13 PM IST
अयोध्या पर फैसले से पहले मुस्लिम आर्कियोलॉजिस्ट का दावा, बाबरी के पहले वहां राम मंदिर था

सार

सुप्रीम कोर्ट अयोध्या के रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है। माना जा रहा है कि अदालत 23 दिन के अंदर फैसला सुना देगी। इसी बीच आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया नॉर्थ के पूर्व रीजनल डायरेक्टर केके मोहम्मद ने दावा किया है कि काफी पुरातत्व सबूत हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद से पहले राम मंदिर था।  

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट अयोध्या के रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है। माना जा रहा है कि अदालत 23 दिन के अंदर फैसला सुना देगी। इसी बीच आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया नॉर्थ के पूर्व रीजनल डायरेक्टर केके मोहम्मद ने दावा किया है कि काफी पुरातत्व सबूत हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद से पहले राम मंदिर था। मुहम्मद आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया की उस टीम में शामिल थे, जिसने 1976-77 में पहली बार भूमि की जांच की थी।

मुहम्मद ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मामले में तीन अहम मुद्दे हैं। पहला पुरातत्व सबूत, दूसरा साहित्य संबंधी सबूत और तीसरा सबूत सामाजिक मुद्दे। 

राम मंदिर के पक्ष में बहुत सारे पुरातत्व सबूत
मुहम्मद ने बताया- पुरातत्व संबंधी बहुत सारे सबूत हैं, जिनसे सिद्ध होता है कि बाबरी मस्जिद के नीचे मंदिर था। मस्जिद के नीचे मंदिर का शानदार ढांचा था। इस विवादित जमीन पर आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया ने दो बार खुदाई की। 

उन्होंने बताया, ''पहली खुदाई 1976-77 के दौरान हुई थी। यह प्रसिद्ध आर्कियोलॉजिस्ट बीबी लाल के नेतृत्व में हुई थी। लाल 1968- 1972 तक आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया के डायरेक्टर जनरल रहे। मैं उस टीम का हिस्सा था और अकेला मुस्लिम भी। 

मस्जिद के नीचे 12 या 13वीं शताब्दी का मंदिर मौजूद
मुहम्मद ने बताया कि यह सर्वे मौजूदा केंद्रीय राज्य मंत्री सैयद नुरुल हुसैन (स्वतंत्र प्रभार) शिक्षा, सोशल वेलफेयर एंड कल्चर के समय में हुआ था। उस वक्त यह मुद्दा इतना विवादित नहीं था। जब हम अंदर गए तो पाया कि मस्जिद के 12 स्तंभ ऐसे थे, जो मंदिर के ही थे। मंदिर 12 या 13वीं शताब्दी का था। यहां कलश मिला था। 

उन्होंने कहा कि अगर आप कुतुब मीनार के पास स्थित कुव्वतुल इस्लाम मस्जिद देखते हैं तो वह भी 27 मंदिरों को तोड़कर बनाई गई है। यह भी एक सबूत है। यहां आप देखेंगे तो आपको कई देवी-देवताओं की मूर्तियां देखने को मिलेंगी। यही हाल बाबरी मस्जिद का था। लेकिन यहां देवी-देवताओं की मूर्तियां नहीं थीं। यहां अष्ट मंगल चिह्न मिले हैं। इसके आधार पर पुरातत्व विभाग ने कहा है कि मस्जिद के नीचे मंदिर था। 

'टेराकोटा से बनी मूर्तियां भी मिली थीं'
उन्होंने बताया कि जब मस्जिद के पश्चिमी हिस्से की खुदाई की गई थी तो उसमें टेराकोटा से बनी मूर्तियां मिली थीं। अगर यहां मस्जिद होती तो मनुष्य या जानवरों के ऐसे चित्र न मिलते, क्यों कि ये इस्लाम में हराम है। इसका मतलब साफ है कि ये मंदिर ही था। 

मुहम्मद के मुताबिक, टीम द्वारा ये सारे सबूत उस वक्त उजागर नहीं किए गए, क्योंकि यह सर्वे इसलिए नहीं हुआ था कि वहां मंदिर है या मस्जिद, इस बारे में पता लगाया जाए। बल्कि यह केवल जगह की सांस्कृतिक जानकारी पता करने के लिए हुआ था। 

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