
मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। दरअसल, अर्नब पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में सीआरपीसी की धारा 482 के तहत मामला दर्ज किया गया है। बता दें कि मई 2018 में उनके खिलाफ यह मामला दर्ज किया गया था।
शिकायतकर्ता को सुनने के बाद देंगे आदेश - हाईकोर्ट
अर्नब गोस्वामी को अलीबाग अदालत ने बुधवार को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस मामले में बुधवार को अर्नब गोस्वामी ने महाराष्ट्र पुलिस की अवैध गिरफ्तारी को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। न्यायमूर्ति एस एस शिंदे और न्यायमूर्ति एम एस कर्णिक की बेंच ने इस संबंध में दोपहर 3 बजे सुनवाई शुरू की जिसमें कोर्ट ने यह कहकर अर्नब की याचिका को टाल दिया कि जब तक वे शिकायतकर्ता और महाराष्ट्र सरकार को नहीं सुन लेते तब तक अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। फिलहाल इस मामले में अब अगली सुनवाई कल यानि शुक्रवार दोपहर 3 बजे होगी।
'20 पुलिसवालों ने उन्हें घर से बाहर निकाला'
याचिका में कहा गया है कि गिरफ्तारी गोस्वामी के व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का हनन है। इसमें कहा गया है कि उन्हें मुंबई पुलिस के लगभग 20 अधिकारियों द्वारा उसके घर से बाहर निकाला गया। कथित रूप से गाड़ी में घसीटा गया था। इस प्रक्रिया में गोस्वामी के बेटे पर हमला किया गया।
बंद केस को दोबारा क्यों खोला गया?
याचिका में कहा गया कि यह चौंकाने वाला है कि एक ऐसा मामला जो बंद था, उसे फिर से क्यों खोला गया? पुलिस ने गोस्वामी पर हमला किया।
किस आरोप में अर्नब के घर आई पुलिस?
अर्नब पर एक मां और बेटे को खुदकुशी के लिए उकसाने का आरोप लगा है। मामला 2018 का है। 53 साल के एक इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उसकी मां ने आत्महत्या कर ली थी। मामले की जांच सीआईडी की टीम कर रही है। कथित तौर पर अन्वय नाइक के लिखे सुसाइड नोट में कहा गया था कि आरोपियों (अर्नब और दो अन्य) ने उनके 5.40 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया था, इसलिए उन्हें आत्महत्या का कदम उठाना पड़ा।
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