
श्रीनगर: आज से 16 साल पहले तक जम्मू कश्मीर भारत का एकमात्र राज्य था, जहां महिलाओं को पिता की विरासत में कोई अधिकार नहीं था। यहां माता-पिता की संपत्ति के डिस्ट्रीब्यूशन का निर्णय उनके पुरुष रिश्तेदारों की सनक और पसंद पर छोड़ दिया गया था। ज्यादातर मामलों में माता-पिता की प्रॉपर्टी में महिलाओं को मिलने वाला हिस्सा पुरुषों को दे दिया जाता था। हालांकि, राज्य के संविधान में मौजूद इस तरह के प्रावधानों अब समाप्त कर दिया गया है।
यहां कुरान के उन प्रावधानों को भी लागू नहीं किया जाता था, जिसमें महिलाओं पैतृक संपत्ति में एक-तिहाई हिस्से को देने का आदेश दिया गया है। बता दें कि कुरान के इन फरमानों का उल्लंघन गैर-इस्लामिक और पाप माना जाता है। 2007 जब गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने पैतृक प्रोपर्टी को लेकर शरिया पर आधारित एक कानून बनाया और राज्य में महिलाओं पैतृक संपत्ति में अधिकार मिले।
2007 में मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट बना
इससे पहले महिलाओं को पैतृक संपत्ति में अधिकार दिलाने वाले इस बिल को एक प्राइवेट सदस्य द्वारा पेश किया गया था। यह बिल 2007 में जम्मू-कश्मीर मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट बन गया। इसे वॉइस वॉट से पारित किया गया। सभी दलों के सदस्यों ने लंबे समय तक मुस्लिम महिलाओं के साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई।
5 अगस्त 2019 को अनु्च्छेद 370 हुआ खत्म
इसके बाद 5 अगस्त 2019 को सरकार ने अनु्च्छेद 370 हटाकर राज्य के विशेष दर्जे क समाप्त कर दिया और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया। इसने सभी को समान अधिकार देने में मदद की। इसके अलावा उसी समय अनुच्छेद 35ए भी समाप्त कर दिया गया है। यह प्रावधान जम्मू-कश्मीर के शासकों द्वारा उन महिलाओं को पैतृक प्रॉपर्टी से वंचित करता था, जिनकी शादी गैर-जम्मू-कश्मीर के भारतीयों या विदेशियों से हुई थी।
राज्य के बाहर शादी करने वाली महिलाओं को मिला डोमिसाइल सार्टिफिकेट
रिपोर्टों के अनुसार, लगभग चार लाख लोगों ने अब तक डोमिसाइल सार्टिफिकेट प्राप्त कर लिया है और इनमें से कश्मीर में लगभग 80,000 आवेदक हैं। अधिकारियों का कहना है कि इनमें 2 से 3% के ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के बाहर शादी की थी। जल्द ही राज्य के सभी लोग डोमिसाइल सार्टिफिकेट के लिए आवेदन पूरा कर लेंगे। इसमें वे महिलाएं भी शामिल हैं जिन्होंने बाहरी लोगों से शादी करने के बाद अपना PRC दर्जा खो दिया था।
महिलाओं ने गैर-कश्मीरी से की शादियां
पिछले तीन दशकों की उथल-पुथल के दौरान कई कश्मीरी महिलाओं ने बाहरी लोगों से शादी की। कई माता-पिता का मानना था कि बेटियों की शादी गैर-स्थानीय लोगों से करना ज्यादा सुरक्षित है, क्योंकि कश्मीर में आतंकवाद और हिंसा काफी बढ़ रही थी। इसके अलावा शिक्षा के लिए जम्मू-कश्मीर से बाहर गईं लड़कियों ने भी बड़ी तादाद में गैर कश्मीरी से शादी की।
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