
Owaisi Vs Rijiju: केंद्र सरकार के केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच अल्पसंख्यकों (Minorities) की स्थिति पर जोरदार ट्विटर वॉर छिड़ गया है। रिजिजू ने एक इंटरव्यू के हवाले से कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यक हिंदुओं से ज्यादा लाभ और सुरक्षा मिल रही है। उन्होंने दावा किया कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोग पाकिस्तान या बांग्लादेश नहीं भागते क्योंकि मोदी सरकार उन्हें अतिरिक्त फायदे देती है।
उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की कल्याणकारी योजनाएं सभी के लिए हैं। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की योजनाएं अल्पसंख्यकों को अतिरिक्त लाभ देती हैं।
ओवैसी ने तुरंत पलटवार किया कि हम किसी सहूलियत की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए भारत में रहते हैं क्योंकि हम अपने हक के लिए लड़ना जानते हैं। उन्होंने कहा कि हम न ब्रिटिशों से भागे, न बंटवारे के वक्त। हमारा इतिहास गवाह है कि हम जुल्म करने वालों से समझौता नहीं करते और न उनसे डरते हैं।
ओवैसी ने रिजिजू के तर्कों को नकारते हुए कहा कि क्या रोज हमें पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, जिहादी या रोहिंग्या कहना ‘लाभ’ है? क्या भीड़ द्वारा पीटना ‘सुरक्षा’ है? क्या मस्जिदों और मजारों को गैरकानूनी तरीके से गिराना ‘सम्मान’ है?
AIMIM प्रमुख ने कहा कि भारतीय मुस्लिम ही एकमात्र समूह है जिनके बच्चे अपने माता-पिता या दादा-दादी से भी बदतर स्थिति में हैं। मुस्लिम बहुल इलाकों में सार्वजनिक सुविधाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है।
ओवैसी ने वक्फ कानून (Waqf Law) में बदलाव को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने रिजिजू से पूछा कि कौन सी ईमानदारी है जिसमें वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य रखे जा रहे हैं? सरकार ने हालांकि कहा है कि ये बदलाव पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए जरूरी हैं।
रिजिजू ने अपनी दलील को दोहराते हुए कहा कि पिछले 11 सालों में मोदी सरकार ने सबका साथ, सबका विकास के सिद्धांत को मजबूत किया है और अल्पसंख्यक समुदाय देश की विकास यात्रा में सक्रिय और बराबर भागीदार बने हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय को बहुसंख्यकों से ज्यादा फंड और सहयोग मिल रहा है।
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