कहां तक पहुंचा गगनयान प्रोजेक्ट? जानें इस बड़े सवाल का जवाब

Published : Jun 02, 2025, 10:50 AM IST
शुभांशु शुक्ला, 4 भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों में से एक हैं।

सार

गगनयान मिशन की तैयारी ज़ोरों पर है। मानवरहित मिशन के बाद 2026-27 में मानव मिशन की उम्मीद। क्या भारत का अंतरिक्ष सपना साकार होगा?

नई दिल्ली: भारत का अपना मानव अंतरिक्ष मिशन, गगनयान, चर्चा में है। शुभांशु शुक्ला, गगनयान के लिए चुने गए चार भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों में से एक, अब Axiom मिशन 4 के साथ अंतरिक्ष में जाने वाले हैं। लेकिन सबके मन में एक सवाल है: गगनयान प्रोजेक्ट कहाँ तक पहुँचा?

भारतीय धरती से, भारतीय रॉकेट से, भारतीय यान में एक भारतीय को अंतरिक्ष में भेजने का वादा 140 करोड़ भारतीयों ने बड़ी उम्मीद से सुना था। 2018 में लाल किले से मोदी जी के भाषण ने गगनयान प्रोजेक्ट को आधिकारिक नाम दिया। लेकिन इसरो का ये सपना बहुत पहले से था। 2006 से ही इस सपने को साकार करने की गंभीर कोशिशें शुरू हो गई थीं।

10 जनवरी 2007 को एक छोटा सा यान अंतरिक्ष में भेजा गया और वापस लाया गया - स्पेस कैप्सूल रिकवरी मिशन। कम बजट में, धीरे-धीरे आगे बढ़ते इस प्रोजेक्ट का एक अहम पड़ाव था 2014 में CARE मिशन। इसमें LVM3 रॉकेट से एक छोटा सा यान अंतरिक्ष में भेजा गया और समुद्र में उतारा गया। इसके बाद 2018 में पैड अबॉर्ट टेस्ट हुआ। प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद इस सपने को और पंख लग गए। चार वायुसेना पायलटों को चुना गया और ट्रेनिंग के लिए रूस भेजा गया।

आज़ादी के 75वें साल में पहला मिशन भेजने की बात थी, लेकिन कोविड महामारी ने इसे रोक दिया। अक्टूबर 2023 में क्रू एस्केप सिस्टम का टेस्ट हुआ। धीरे-धीरे प्रोजेक्ट आगे बढ़ा। रूस से ट्रेनिंग लेकर चारों पायलट वापस आ गए। बेंगलुरु में इसरो के नेतृत्व में अगले चरण की ट्रेनिंग शुरू हुई। 27 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री ने चारों अंतरिक्ष यात्रियों को देश के सामने पेश किया। अब कोशिश है कि इस साल पहला मानवरहित मिशन भेजा जाए।

18 दिसंबर 2024 को CARE मिशन की दसवीं सालगिरह पर पहले मानवरहित मिशन के रॉकेट का निर्माण शुरू हुआ। इसरो के सूत्रों के मुताबिक क्रू मॉड्यूल का काम तेज़ी से चल रहा है। पहले मार्च में मिशन भेजने की बात थी, लेकिन कई कारणों से ऐसा नहीं हो पाया। अब कोशिश है कि साल के अंत तक G1 मिशन लॉन्च किया जाए।

हाल ही में NVS-02 सैटेलाइट में आई तकनीकी खराबी और PSLV की असफलता ने काम को प्रभावित किया है। अब और सावधानी से काम हो रहा है। मानवरहित मिशन में जाने वाली 'व्योममित्र' रोबोट का काम लगभग पूरा हो गया है और आखिरी टेस्ट शुरू हो गए हैं। तीन मानवरहित मिशन सफल होने के बाद ही मानव मिशन भेजा जाएगा। इसरो टीम को उम्मीद है कि पहला कदम पार करने के बाद बाकी काम तेज़ी से होगा।

अब नया लक्ष्य है 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में पहला मानव मिशन भेजना। चुने गए चार लोगों में से कौन जाएगा, ये अभी तय नहीं है। गगनयान के बाद इसरो का अगला बड़ा लक्ष्य है अपना स्पेस स्टेशन बनाना। इस पर भी काम शुरू हो गया है।

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