
अयोध्या. केंद्रीय जांच ब्यूरों (सीबीआई) स्पेशल अदालत ने बुधवार को बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है। स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए यह माना है कि साल 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस पूर्व नियोजित नहीं था। अदालत के फैसले के बाद केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद पूर्व उपप्रधानमंत्री और भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के घर उनसे मिलने पहुंचे हैं।
क्या कहा राजनाथ सिंह ने?
बाबरी विध्वंस मामले में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी 32 आरोपियों को बरी किए जाने पर खुशी जताते हुए इसे न्याय की जीत बताया है। राजनाथ ने अपने ट्वीट में कहा कि लखनऊ की विशेष अदालत से बरी किए गए बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में लालकृष्ण आडवाणी, कल्याण सिंह, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, उमाजी समेत 32 लोगों के किसी भी षड्यंत्र में शामिल न होने के निर्णय का मैं स्वागत करता हूं। इस निर्णय से यह साबित हुआ है कि देर से ही सही मगर न्याय की जीत हुई है।
मामले में कौन थे 32 आरोपी?
बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डॉ. राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, महाराज स्वामी साक्षी, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धर्मेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ और धर्मेंद्र सिंह गुर्जर आरोपी थे।
अयोध्या में हाई अलर्ट
फैसला आने से पहले अयोध्या में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। डीआईजी दीपक कुमार ने बताया कि सीआईडी और एलआईयू की टीमें सादी वर्दी में तैनात कर दी गई हैं। बाहरी लोग अयोध्या में आकर माहौल न बिगाड़ने पाएं इसको लेकर खास सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने बताया कि पूरे जिले में चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। वहीं, लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत के बाहर करीब 2 हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा प्रदेश के 25 संवेदनशील जिलों में सुरक्षा व्यवस्था तगड़ी कर दी गई है।
1 सितंबर को पूरी हो चुकी थी सुनवाई
बाबरी विध्वंस केस में विशेष सीबीआई (CBI) अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें, गवाही, जिरह सुनने के बाद 1 सितंबर को मामले की सुनवाई पूरी कर ली थी। 2 सितंबर से फैसला लिखना शुरू हो गया था। इससे पहले वरिष्ठ वकील मृदल राकेश, आईबी सिंह और महिपाल अहलूवालिया ने आरोपियों की तरफ से दलीलें पेश कीं, इसके बाद सीबीआई के वकीलों ललित सिंह, आरके यादव और पी. चक्रवर्ती ने भी अपनी दलीलें रखीं।
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