
नई दिल्लीः ये तो सब जानते हैं कि चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान को भारत के खिलाफ भड़काने में लगा है। इसी वजह से भारत के एक राज्य जितना बड़ा बांग्लादेश भी भारत से लड़ने के लिए तैयार रहता है। साथ ही, वहां के कट्टरपंथी हिंदू समाज के घरों को तोड़ रहे हैं और कई युवाओं की हत्या कर चुके हैं, जिसे बांग्लादेश सरकार का भी परोक्ष रूप से समर्थन मिल रहा है। इसी बीच, पाकिस्तान की धरती से भारत के समर्थन में एक खुला खत सामने आया है।
जी हां, पाकिस्तान के बलूचिस्तान के एक प्रमुख नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया के जरिए भारत और भारत के विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर को एक खुला पत्र लिखकर अपना समर्थन दिया है। इस पत्र के जरिए उन्होंने चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते गठबंधन को लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि आने वाले कुछ महीनों में चीन अपनी सेना को पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके में भी तैनात कर सकता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर को लिखे अपने खुले पत्र में उन्होंने बताया है कि बलूचिस्तान दशकों से पाकिस्तान के नियंत्रण में दमन का सामना कर रहा है, जिसमें सरकार प्रायोजित हिंसा और मानवाधिकारों का उल्लंघन भी शामिल है।
बलूचिस्तान के राष्ट्रवादी नेताओं ने मई 2025 में ही पाकिस्तान से अलग होकर अपनी आजादी की घोषणा कर दी थी। अब, बलूचिस्तान के नेता मीर बलूच ने घोषणा की है कि बलूचिस्तान गणराज्य 2026 के पहले हफ्ते में 'बलूचिस्तान वैश्विक राजनयिक सप्ताह 2026' मनाएगा। उन्होंने कहा है कि इससे बलूचिस्तान को दुनिया भर के देशों के साथ सीधे जुड़ने में मदद मिलेगी।
अपने खुले पत्र में भारत को नए साल की शुभकामनाएं देते हुए मीर बलूच ने लिखा है, "बलूचिस्तान गणराज्य के 6 करोड़ देशभक्त नागरिकों की ओर से, हम भारत के एक सौ चालीस करोड़ लोगों, संसद के दोनों सदनों, मीडिया, नागरिक समाज और सभी सम्मानित व्यक्तियों को नए साल 2026 की अपनी गहरी और सच्ची बधाई देते हैं। यह शुभ अवसर उन गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक, आर्थिक, राजनयिक, रक्षा और बहुआयामी संबंधों को याद करने और जश्न मनाने का मौका देता है जो सदियों से भारत और बलूचिस्तान को एक साथ बांधे हुए हैं।" मीर बलूच ने लिखा है कि ये स्थायी संबंध हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) जैसे पवित्र स्थलों से पहचाने जाते हैं, जो हमारी साझा विरासत और आध्यात्मिक संबंधों का एक कालातीत प्रतीक है।
उन्होंने कहा- एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में, वह दोस्ती, विश्वास और आपसी हितों को बढ़ावा देने में भारत और उसकी सरकार को अपना अटूट समर्थन देते हैं, जैसे कि शांति, समृद्धि, विकास, व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, भविष्य की ऊर्जा चुनौतियां और छिपे हुए खतरों को कम करना। बलूचिस्तान के लोगों ने पिछले उन्यासी सालों से पाकिस्तान के कब्जे, सरकार प्रायोजित आतंकवाद और मानवाधिकारों के हनन को सहा है। अब इस सड़ते हुए नासूर को जड़ से खत्म करने का समय आ गया है, जो हमारे राष्ट्र के लिए स्थायी शांति और संप्रभुता सुनिश्चित करेगा।" उन्होंने चेतावनी दी कि बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक गठबंधन को बेहद खतरनाक मानते हैं। बीजिंग ने इस्लामाबाद के साथ मिलकर चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को उसके अंतिम चरण में पहुंचा दिया है।
उन्होंने कहा, "अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता बलों की क्षमताओं को और मजबूत नहीं किया गया और पुराने ढर्रे पर उनकी अनदेखी जारी रही, तो यह अनुमान लगाया जा सकता है कि चीन कुछ ही महीनों में बलूचिस्तान में अपनी सेना तैनात कर सकता है। 6 करोड़ बलूचिस्तानियों की इच्छा के बिना बलूचिस्तानी धरती पर चीनी जूतों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान के भविष्य के लिए एक अकल्पनीय खतरा और चुनौती पेश करेगी।"
मीर बलूच ने 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए साहसी और दृढ़ कदमों की सराहना की। पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान समर्थित आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया गया था। मीर बलूच ने इन कार्रवाइयों को भारत के अनुकरणीय साहस और क्षेत्रीय सुरक्षा व न्याय के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता का प्रदर्शन बताया।