
बेंगलुरु: काबिल पुलिस अफसर माने जाने वाले बी. दयानंद चिन्नास्वामी स्टेडियम भगदड़ वाले दिन बेंगलुरु शहर के पुलिस कमिश्नर की अपनी ड्यूटी ठीक से क्यों नहीं निभा पाए? सूत्र यही बता रहे हैं। दयानंद ने RCB की जीत के जश्न के दौरान सही तैयारी और सुरक्षा बंदोबस्त नहीं किए थे। भगदड़ के बाद भी स्थिति को ठीक से नहीं संभाला। बताया जा रहा है कि उनकी गलती और लापरवाही के चलते ही उन पर निलंबन की कार्रवाई हुई है।
सीएम के चहेते अफसर
दयानंद अच्छे अफसर हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के वो चहेते भी हैं। इसलिए 2015 में एम.ए. सलीम के बाद उन्हें मैसूर शहर का पुलिस कमिश्नर बनाया गया था। सिद्धारमैया के दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें बेंगलुरु शहर के पुलिस कमिश्नर की अहम जिम्मेदारी दी गई थी। सरकार और मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए मौके को दयानंद ने बखूबी निभाया भी था। लेकिन, 4 जून को वो क्यों चूक गए, ये सवाल पूरे पुलिस विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है।
दयानंद कुशल और काबिल अफसर हैं। फिर भी RCB के जश्न वाले दिन वो चूक गए। कुछ अफसरों का कहना है कि उन्होंने इस बारे में कोई तैयारी बैठक नहीं की थी। संबंधित अफसरों के साथ बैठक कर जिम्मेदारियां नहीं बांटी थीं। सुरक्षा बंदोबस्त को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश भी नहीं थे।
भीड़ बेकाबू हो रही है और पुलिस संभाल नहीं पा रही है, इसकी जानकारी सरकार को नहीं दी गई। जब पता चला कि फैन्स मेट्रो से भारी संख्या में आ रहे हैं, तो मेट्रो बंद करवाई जा सकती थी। शहर के सभी रास्तों पर नियंत्रण किया जा सकता था। लेकिन, बताया जाता है कि कार्यक्रम वाले दिन दयानंद अपने ऑफिस में प्रगति समीक्षा बैठक में व्यस्त थे।
मृतकों की जानकारी सही से नहीं दी
सबसे बड़ी बात, दोपहर 3.45 बजे भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई, लेकिन इसकी सही जानकारी सरकार को नहीं दी गई। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सिर्फ एक मौत की जानकारी दी गई थी। 11 लोगों की मौत की खबर मुख्यमंत्री तक शाम 5.45 बजे पहुंची। इस मामले में, शहर के पुलिस कमिश्नर होने के नाते दयानंद ने एक अहम घटना की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को देने का प्रोटोकॉल नहीं निभाया।
दूसरी तरफ, सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल क्यों नहीं दिया गया, इस पर भी बहस छिड़ गई है। कहा जा रहा है कि इसमें IAS-IPS की लड़ाई भी एक वजह है। क्रिकेट मैच के दौरान सीनियर पुलिस अफसरों को पास नहीं दिए जाते थे, इसी नाराजगी और क्रिकेट संस्था पर शक के चलते क्या सुरक्षा बंदोबस्त नहीं किए गए, ये सवाल भी उठ रहा है। इन्हीं सब वजहों से दयानंद को निलंबित किया गया है। सूत्र बताते हैं कि सरकार सिर्फ खुद पर लग रहे आरोपों से बचने के लिए दयानंद पर कार्रवाई नहीं कर रही है।
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