बीमार महिला को कंधे पर उठाकर 12 किलोमीटर भागे परिजन, तब बची जान, यहां कई मरीज रास्ते में ही तोड़ देते हैं दम

Published : Jul 20, 2022, 11:01 AM ISTUpdated : Jul 20, 2022, 11:06 AM IST
बीमार महिला को कंधे पर उठाकर 12 किलोमीटर भागे परिजन, तब बची जान, यहां कई मरीज रास्ते में ही तोड़ देते हैं दम

सार

उत्तराखंड (Uttarakhand) के कई इलाके ऐसे हैं, जहां बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं (Basic Health Facility) तक मौजूद नहीं है। यही कारण है कि यहां कोई बीमार हो जाए तो परिजनों को उन्हें कंधे पर उठाकर डॉक्टर के पास पहुंचना होता है।   

बडियार. उत्तराखंड का बडियार क्षेत्र ऐसा हैं, जहां बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। सड़कों का अभाव है और पहाड़ी रास्तों पर चलना मुश्किल है। हास्पिटस व डॉक्टर की सुविधा भी मौजूद नहीं है, जो आम लोगों की बड़ी जरूरत होती है। यही कारण है कि यहां के बडियार में एक 52 वर्षीय बीमार महिला को परिजन 12 किलोमीटर तक कंधे पर उठाकर डॉक्टर के पास पहुंचे। यह घटना उत्तराखंड की स्वास्थ्य सुविधाओं की खराबी भी उजागर करती है। 

क्या है पूरा मामला
उत्तरकाशी जिले के डिंगाडी गांव की रहने वाली शकुंतला देवी एक सप्ताह से तेज डिहाइड्रेशन और बुखार से पीड़ित थी। अभी तक उनका घरेलू उपचार ही चल रहा था लेकिन काम नहीं आया। परिजनों के उन्हें डॉक्टर को दिखाने की योजना बनाई लेकिन सबसे बड़ी समस्या थी कि 12 किलोमीटर कैसे पहुंचा जाए। फिर परिजनों ने कंधे से ही महिला को हास्पिटल पहुंचाने की प्लानिंग की।

कैसे बनाई पालकी 
जब महिला के परिजनों ने 12 किमी दूर सरनोल में एक डॉक्टर को दिखाने के लिए उन्हें कंधों से ले जाने का फैसला किया। पहले महिला को एक कुर्सी पर बिठाया गया। फिर उसे बांस के बने फ्रेम से बांध दिया और उसे अपने कंधों पर उठाकर पहले डॉक्टर के पास ले गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि आजादी के सात दशक बाद और उत्तराखंड के निर्माण के 22 साल बाद भी जिले के बडियार के लगभग आठ गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति दयनीय है। 

कोई भी बुनियादी सुविधा नहीं 
स्थानीय लोगों ने कहा कि बडियार में सर, डिंगाडी, गोथुका, पेंटी, किमदार और लेवताडी जैसे गांवों में किसी भी तरह की स्वास्थ्य सुविधा नहीं है। कहा कि यहां सिर्फ स्वास्थ्य सुविधाओं का ही अभाव नहीं है बल्कि सड़कें तक नहीं हैं। शैक्षिक सुविधाएं भी नदारद हैं। यही वजह है कि सिर्फ शकुंतला देवी ही नहीं इलाके के कई बीमार लोगों को डांडियों पर ही निकटतम स्वास्थ्य केंद्रों में ले जाया जाता है। कईयों की तो रास्ते में मौत हो जाती है। 

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