
नई दिल्ली. युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं लड़ा जाता। दुश्मनों को खोजने के लिए अब किस्म-किस्म के युद्धक गैजेट भी इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसा ही एक गैजेट नाइट विजन गॉगल्स (Night Vision Goggles) है। इसे किंग ऑफ नाइट विजन भी कहते हैं। इस गैजेट का इस्तेमाल हमारी CRPF भी करती है। गणतंत्र दिवस पर पहली बार CRPF इस गैजेट का प्रदर्शन करेगी। एएनआई पर पब्लिश एक खबर के अनुसार, राजपथ पर मार्च के दौरान CRPF के जवान इस चश्मे को पहने दिखेंगे। ये चश्मे कमांडोज को 120 डिग्री का विजन देते हैं। यानी दायें-बायें और अंधेरे में कोई भी दुश्मन छुपा है, कमांडो उसे देख सकता है।
लादेन की मौत के बाद चर्चाओं में आया था
अलकायदा का आतंकी ओसामा बिन लादेन इसी चश्मे की वजह से पकड़ में आ गया था। 2 मई, 2011 को पाकिस्तान के ऐब्टाबाद में एक घर में छुपकर बैठे लादेन को रात के अंधेरे में इसी चश्मे की वजह से अमेरिकी सील कमांडोज़ (American SEAL Commando) ने खोजकर मार डाला था।
दुनिया की कई सेनाएं करती हैं इसका इस्तेमाल
दुनिया की कई सेनाएं इस चश्मे का इस्तेमाल करती हैं। इन्हें पहनकर कमांडोज रात में भी अपना टारगेट आसानी से ढूंढ़ लेते हैं। हालांकि कहा जा रहा है कि CRPF के पास जो चश्मे हैं, वे अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल चश्मे से अलग हैं। पूर्व यूएस SEAL चीफ वॉरफेयर ऑपरेटर मैट बिसोनेट ने अपनी किताब 'नो इज़ी डे' में इस चश्मे का जिक्र किया था। ओसामा लादेन को मारने वाले मिशन के लिए हरेक कमांडो को 65 हजार डॉलर के फोर ट्यूब नाइट विजन चश्मे उपलब्ध कराए गए थे।
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