
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद भाजपा ने अपने पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद आरके सिंह को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया। पार्टी ने उनसे कहा है कि वे अपनी स्थिति स्पष्ट करें और बताएं कि उन्हें पार्टी विरोधी टिप्पणियों के लिए क्यों न निकाला जाए।
चुनाव के दौरान आरके सिंह ने एनडीए के कई उम्मीदवारों पर सवाल उठाए और बिहार सरकार पर भी आरोप लगाए कि बिजली घोटाला हुआ। उनके इन बयानों ने पार्टी में बेचैनी पैदा कर दी। विपक्षी दल इस विवाद का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे थे। भाजपा ने चुनाव प्रचार के समय तुरंत कार्रवाई से परहेज किया, ताकि राजनीतिक विवाद ना बढ़े।
भाजपा ने एक पत्र जारी कर लिखा कि "आपकी गतिविधियाँ पार्टी के विरुद्ध हैं और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आती हैं। इस कारण आपको निलंबित किया जा रहा है और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।" उन्हें यह निर्देश दिया गया कि एक सप्ताह के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करें।
पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने केवल सरकार तक ही नहीं, बल्कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जदयू के अनंत सिंह, राजद के सूरजभान सिंह सहित कई नेताओं पर तीखे हमले किए। उन्होंने तो यहाँ तक कहा कि ऐसे उम्मीदवारों को वोट देने से "किसी छोटे गड्ढे में डूब जाना बेहतर है।" उन्होंने राजद के कई उम्मीदवारों पर आपराधिक संबंधों का आरोप लगाया और मतदाताओं से उन्हें अस्वीकार करने की अपील की।
भाजपा ने चुनाव प्रचार में आरके सिंह के खिलाफ कार्रवाई नहीं की थी। लेकिन चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पार्टी ने उन्हें अनुशासनहीनता और पार्टी छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयानों के कारण निलंबित कर दिया। इससे राजनीतिक गलियारों में सस्पेंस और अटकलें बढ़ गई हैं।
अब सवाल यह है कि आरके सिंह अपनी सफाई में क्या कहेंगे और क्या पार्टी उन्हें पूर्ण रूप से निष्कासित कर देगी? उनका जवाब अगले सप्ताह में आने वाला है और यह बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।
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