
चंडीगढ़. महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के रुझान लगातार आ रहें है। इसी कड़ी में 90 सीटों वाली हरियाणा की सत्ता का समीकरण बेहद रोचक हो गया है। चुनाव से पहले भाजपा ने नारा दिया था 'अबकी बार, 75 पार', लेकिन रुझान में बहुमत के आंकड़े 46 तक पहुंचती नहीं दिख रही है। चुनाव आयोग के अनुसार अब तक के रुझानों में हरियाणा में बीजेपी, कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। वोटों का गणित भी इतना दिलचस्प है कि बीजेपी और कांग्रेस कभी 35-35 सीटों पर तो कभी 37-33 पर आगे चल रही हैं।
बीजेपी और जेजेपी के साथ आने पर
सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी के सामने क्या विकल्प रह जाते हैं। भाजपा 46 के आंकड़े तक कैसे पहुंचेगी? सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि दुष्यंत चौटाला ने कांग्रेस से सीएम पद की मांग की है। ऐसे में साफ है कि उनकी महत्वाकांक्षा बड़ी है। इसे देखते हुए बीजेपी निर्दलीयों और अन्य को प्राथमिकता में रख सकती है। बीजेपी के प्रयास होंगे कि JJP से बात न बनने की स्थिति में वह INLD, बीएसपी और अन्य को साधकर बहुमत के आंकड़े तक पहुंच जाए।
इस स्थिति से बढ़ सकती है मुश्किलें
35 सीट का आंकड़ा फाइनल होता है तो बीजेपी को सरकार बनाने के लिए 11 सीटों की जरूरत पड़ेगी। अब 7 निर्दलीय और इंडियन नैशनल लोकदल के 2 उम्मीदवार यदि बीजेपी के साथ आते हैं तो भी बीजेपी के लिए मुश्किल हो सकती है। यदि बीजेपी इनकी बजाय दुष्यंत चौटाला की जेजेपी को साधती है तो उसे सरकार बनाने में कोई मुश्किल नहीं आएगी।
कांग्रेस-JJP के साथ आने पर ये हो सकता है
लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारी कांग्रेस में जान फूंकते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा इसे 35 के आंकड़े पर पहुंचाते दिख रहे हैं। दुष्यंत चौटाला की जेजेपी ने इस चुनाव में जाट आंदोलन को मुद्दा बनाते हुए बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। ऐसे में इस बात की संभावना जताई जा रही है कि वह कांग्रेस के साथ जा सकते हैं।
कांग्रेस, JJP और अन्य के साथ आने पर
अगर अभी तक के रुझान नतीजों में तब्दील होते हैं, तो कांग्रेस को भी बहुमत के लिए 11 सीटों की दरकार होगी। जेजेपी (10) और 1 अन्य के साथ गठबंधन होने पर कांग्रेस को सरकार बनाने में मुश्किल नहीं आएगी।
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