
नई दिल्ली. देश में जारी कोरोना संकट के बीच भारतीय जनता पार्टी नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ पर पूरे देश में अभियान चलाएगी। कोरोना महामारी को देखते हुए बीजेपी इस बार अभियान को डिजिटल माध्यम से चालएगी। पार्टी केंद्र सरकार की उपलब्धियों के बारे में जन जन को बताने का अभियान चलाएगी।
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ के अवसर पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा संबोधित भी करेंगे। जेपी नड्डा का यह संबोधन फेसबुक लाइव के जरिये होगा। हर स्तर पर वर्चुअल तरीके से रैली का भी आयोजन किया जाएगा।
30 मई को पूरे हो रहे हैं 1 साल
मोदी सरकार की 2019 में सत्ता में दोबारा वापसी को 30 मई को सालभर हो जाएगा। 2014 से ही जब मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने थे, तब से ही बीजेपी और सरकार वर्षगांठ के मौके पर अपनी उपलब्धियों को लोगों को बताती रही है। 23 मई 2019 में लोकसभा चुनाव के नतीजे आए थे, जिसमें प्रचंड बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की थी। नरेंद्र मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने थे।
मोदी अब तक लिए गए अहम निर्णय
अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी
मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में सबसे एतिहासिक फैसला जम्मू-कश्मीर को लेकर लिया, जो जनसंघ के जमाने से उसकी प्राथमिकता रहा है। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाने का कदम उठाने के साथ-साथ राज्य को दो हिस्सो में बांटने का काम भी इसी कार्यकाल में हुआ। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को निष्प्रभावी करने का प्रस्ताव मंजूर किया और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया। मोदी सरकार के इस फैसले के बाद कश्मीर में एक देश, एक विधान और एक निशान लागू हो गया है।
तीन तलाक से निजात
नरेंद्र मोदी सरकार ने लगातार दूसरी बार सत्ता में आते ही सबसे पहले मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात दिलाने का कदम उठाया। मोदी सरकार ने तीन तलाक पर पाबंदी के लिए 'मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2019' को लोकसभा और राज्यसभा से पारित कराया। एक अगस्त 2019 से तीन तलाक देना कानूनी तौर पर जुर्म बन गया। राज्यसभा में बहुमत न होन के बाद भी मोदी सरकार इस कानून को अमलीजामा पहनाने में कामयाब रही। सरकार के पहले कार्यकाल से ही यह मुद्दा बीजेपी के प्रमुख एजेंडे में शामिल था।
नागरिकता संशोधन कानून
नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में नागरिकता संशोधन कानून बड़े फैसले के तौर पर देखा जा सकता है। 10 जनवरी 2020 को इसे पूरे देश मे लागू कर दिया गया। इस कानून से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अन्य देशों में रह रहे हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी और यहूदी को भारतीय नागरिकता मिल सकती है। इस कानून में किए गए बदलाव को लेकर देश भर में कई महीने विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें कई लोगों की जानें भी गई। मुस्लिम महिलाएं इस कानून के खिलाफ सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रही थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय गृहमंत्री तक ने कहा कि इस कानून के जरिए देश के किसी भी अल्पसंख्यक की नागरिकता नहीं छीनी जाएगी। इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी रहा लेकिन सरकार ने अपने कदम नहीं खींचे।
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