
नई दिल्ली। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने वक्फ विधेयक (Waqf Bill) में प्रस्तावित विवादास्पद संशोधनों का अध्ययन कर रहे संयुक्त संसदीय आयोग के कार्यकाल को बढ़ाने की मांग की है।
सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा और विपक्ष दोनों ने जेपीसी का समय बजट सत्र तक बढ़ाने के लिए प्रस्ताव पेश किया है। यह अगले साल जुलाई में हो सकता है। एक दिन पहले समिति के विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी। इस दौर समिति के कार्यकाल को बढ़ाने का अनुरोध किया गया था।
कांग्रेस के गौरव गोगोई और तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी सहित विपक्षी नेताओं ने समिति के अध्यक्ष भाजपा के जगदम्बिका पाल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी दलों के नेताओं ने आरोप लगाया कि वह 29 नवंबर की समय सीमा तक कार्यवाही पूरा करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन के लिए केंद्र सरकार वक्फ विधेयक 2024 लाई है। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के शासन में सुधार करना है। कहा जा रहा है कि इससे जवाबदेही और पारदर्शिता आएगी। विपक्ष और मुस्लिम समुदाय द्वारा इन बदलावों का विरोध किया जा रहा है। लोकसभा में पेश किए जाने के बाद विधेयक को विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा गया है।
वक्फ, एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ "दान" है। मुसलमानों द्वारा धार्मिक, धर्मार्थ या निजी उद्देश्यों के लिए दान की गई व्यक्तिगत संपत्ति को वक्फ कहा जाता है। एक बार वक्फ घोषित होने के बाद संपत्ति का स्वामित्व अल्लाह को माना जाता है। इसे वक्फ से वापस नहीं ले सकते। भारत में वक्फ संपत्तियों का शासन विभिन्न कानूनी व्यवस्थाओं के माध्यम से विकसित हुआ है। इसका समापन 1995 के वक्फ अधिनियम में हुआ।
1995 के वक्फ कानून में संपत्तियों की सूची बनाने, जांच करने, गवाहों को बुलाने और सार्वजनिक दस्तावेजों की मांग करने के लिए एक सर्वेक्षण आयुक्त की नियुक्ति अनिवार्य की गई है। इसमें वक्फ संपत्तियों को अतिक्रमण से बचाने के प्रावधान भी शामिल हैं। इसमें उल्लंघन करने वालों के लिए सजा का प्रावधान है। 2013 में किए गए संशोधनों ने ऐसी संपत्तियों की बिक्री, विनिमय या हस्तांतरण पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगाकर इन सुरक्षाओं को और मजबूत किया।
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