बड़ा फैसला- Bombay HC ने की 1996 बाल हत्याकांड की आरोपी सीमा-रेणुका की फांसी रद्द, उम्रकैद में बदली मौत की सजा

Published : Jan 18, 2022, 04:22 PM ISTUpdated : Jan 18, 2022, 04:24 PM IST
बड़ा फैसला- Bombay HC ने की 1996 बाल हत्याकांड की आरोपी सीमा-रेणुका की फांसी रद्द, उम्रकैद में बदली मौत की सजा

सार

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने 1996 बाल हत्याकांड की आरोपी सीमा और रेणुका की फांसी रद्द कर दिया है.    

मुंबई :  बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने  एक बड़ा फैसला सुनाया है। दरअसल 1996 के बहुचर्चिच बाल हत्याकांड की आरोपी रेणुका शिंदे और सीमा गवित  की फांसी रद्द कर दी है। कोर्ट ने दोषी बहनों रेणुका शिंदे और सीमा गवित की फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है।   

मां के साथ मिलकर करती थीं अपहरण
रेणुका शिंदे और सीमा गवित अपनी मां के साथ मिलकर मासूम बच्चों की अपहरण कर उनसे अपराध करवाती थीं और मकसद पूरा हो जाने पर उनकी बेरहमी से हत्या कर देती थीं। गिरफ्तार होने तक 13 बच्चों का अपरहण और 9 बच्चों की हत्या को अंजाम दे चुकी थीं। इस मामले में कोर्ट ने दोनों  को दोषी ठहराया था।  

2001 में ट्रायल कोर्ट ने सुनाया था मौत का फैसला
2001 में कोल्हापुर ट्रायल कोर्ट ने दोनों बहनों को मौत की सजा सुनाई थी,  2004 में हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद साल 2006 में मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा जहां न्यायालय की ओर से अपील को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद दोनों बहनों ने फांसी की सजा को माफ करने के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से दया याचिका लगाई थी, जिसे 2014 में खारिज कर  दिया था।  राष्ट्रपति के पास से दया याचिका खारिज होने के 8 साल बाद दोनों बहन एक बार फिर उच्च न्यायालय पहुंची थीं. दोनों बहनों ने हाईकोर्ट के सामने दलील दी थी कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से फांसी पर मुहर लगने और राष्ट्रपति की ओर से दया याचिका खारिज होने के बीच करीब आठ तक इतंजार करना पड़ा। दोनों बहनों में आठ साल के समय को अनुचित बताया और कहा कि इस दौरान उनको मानसिक यातना झेलनी पड़ी। 

हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को उम्र कैद में किया तब्दील
इसके बाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को दोनों बहनों की फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया. कोर्ट ने कहा, 'दया याचिकाओं के निपटारे में सात साल, दस महीने और 15 दिन की देरी हुई है, हम पाते हैं कि इसके लिए पूरी तरह से अधिकारी, सरकारें, खासकर राज्य सरकार जिम्मेदार है।'

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