
जम्मू. सब-इंस्पेक्टर रिक्रूटमेंट में हुए कथित घोटाले(J-K sub-inspectors recruitment scam) के सिलसिले में गिरफ्तार सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक मेडिकल आफिसर को यहां की एक लोकल कोर्ट ने 10 दिन की CBI रिमांड पर भेज दिया है। सीबीआई ने मंगलवार को बीएसएफ कमांडेंट (मेडिकल) करनैल सिंह को अपने बेटे को जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड (JKSSB) द्वारा आयोजित पुलिस सब-इंस्पेक्टर की भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र दिलाने कराने के लिए दलालों का इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
जानिए घोटाले से जुड़ी डिटेल्स
अधिकारियों ने कहा कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अमरजीत सिंह की अदालत ने बुधवार को उन्हें 10 दिन के रिमांड पर भेज दिया। सीजेएम ने केस डायरी का अध्ययन करने के बाद कहा कि जांच प्रारंभिक चरण में है और जांच एजेंसी को आरोपी की रिमांड की मांग को मंजूर कर लिया। बीएसएफ के पलौरा मुख्यालय में तैनात करनैल सिंह की गिरफ्तारी से घोटाले में गिरफ्तार लोगों की संख्या 9 हो गई है। पांच व्यक्ति 29 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि तीन अन्य को 21 अक्टूबर तक जेल भेज दिया गया है।
परीक्षा के दिन 27 मार्च की सुबह सिंह को जम्मू के गंग्याल के एक घर में कथित तौर पर प्रश्नपत्र मुहैया कराया गया था। आरोप है कि कुछ अन्य कैंडिडेट्स को भी परीक्षा से चंद घंटे पहले सिंह के आवास पर लीक हुआ प्रश्नपत्र मिला। सीबीआई ने कहा कि जांच से पता चला है कि इच्छुक उम्मीदवारों और उनके परिवारों द्वारा परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र तक पहुंचने के लिए कथित तौर पर 20 से 30 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।
कई जगहों पर छापे मारे गए थे
प्रश्नपत्र लीक मामले में सीबीआई ने कई जगहों पर दो बार छापेमारी की थी। अधिकारियों ने बताया कि जांच एजेंसी ने अपनी प्राथमिकी में जम्मू जिले के अखनूर में एक कोचिंग सेंटर के मालिक अविनाश गुप्ता और बेंगलुरु की एक कंपनी का भी नाम लिया है। सूत्रों ने कहा कि करनैल सिंह, जिन्हें सीबीआई ने पूछताछ के लिए बुलाया था, ने जांच में सहयोग नहीं किया, जिसके बाद एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार किया। हालांकि, उनकी पत्नी और उनकी बेटी ने दावा किया कि करनैल सिंह निर्दोष हैं। वह किसी भी घोटाले में शामिल नहीं थे।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अनियमितताओं के आरोपों के बाद जुलाई में पुलिस सब-इंस्पेक्टर की भर्ती रद्द कर दी थी और सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। सीबीआई ने 5 अगस्त को तलाशी के बाद एक बयान में कहा था, "परिणाम 4 जून 2022 को घोषित किए गए थे। परीक्षा में गड़बड़ियों के आरोप थे। जम्मू-कश्मीर सरकार ने इसकी जांच के लिए एक जांच समिति का गठन किया था।"
यह आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने जेकेएसएसबी, बेंगलुरु स्थित निजी कंपनी, लाभार्थी उम्मीदवारों और अन्य के अधिकारियों के बीच एक साजिश की। उप-निरीक्षकों के पदों के लिए लिखित परीक्षा के संचालन में घोर अनियमितताएं कीं। एजेंसी ने कहा था कि जांच रिपोर्ट से पता चला है कि जम्मू, राजौरी और सांबा जिलों से चुने गए उम्मीदवारों का चौंकाने वाला प्रतिशत था। जेकेएसएसबी द्वारा नियमों का उल्लंघन कथित तौर पर बेंगलुरु की एक निजी कंपनी को प्रश्न पत्र सेट करने का काम सौंपते हुए पाया गया था।
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