
लंदनः अब वर्कप्लेस में किसी को गंजा (Bald) कहना यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) के केस में आएगा. ब्रिटेन (Britain) के एक इंप्लायमेंट जजेस पैनल ने कहा है कि वर्कप्लेस पर किसी को गंजा नहीं बुलाया जा सकता है. जज जोनाथन ब्रेन के साथ तीन सदस्यीय जजेस पैनल को यह फैसला करना था कि किसी के सिर पर कम बाल होने का जिक्र करना अपमान है या ह्रासमेंट है. इसी पर सहमति जताते हुए यह निर्णय लिया गया कि यह यौन उत्पीड़न के समान है. इस बारे में वेस्ट यॉर्कशायर की ब्रिटिश बंग कंपनी पर नौकरी से बिना कारण निकाले जाने का आरोप लगाया था. साथ ही यह आरोप भी लगाया कि मुझे गंजा कहकर बुलाया जाता है. विरोध करने पर बिना कारण मुझे निकाल दिया गया. यह आरोप टोनी फिन नामक एक व्यक्ति ने कंपनी पर लगाया था.
जजेस पैनल ने माना यौन उत्पीड़न का मामला
जजेस ने अपने फैसले में कहा कि एक वर्कप्लेस में गंजा कहना किसी के साथ ह्रासमेंट की तरह है. चूंकि बालों का गिरना हार्मोनल चेंज है. हार्मोनल चेंज महिलाओं के साथ भी होता है. इससे शुरू हुई परेशानियों का मजाक बनाना यौन उत्पीड़न ही कहा जाएगा. जजेस ने कहा कि बिना कारण के नौकरी से निकाले जाने पर भी सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद फिन के दावे को सही पाया गया. कोर्ट के मुताबिक फिन को इसका मुआवजा भी मिलेगा, जिसके लिए अलग से तारीख रखी जाएगी. जानकारी दें कि इस मामले की सुनवाई फरवरी और अप्रैल में हुई थी. उत्तरी इंग्लैंड के शेफील्ड में सुनवाई की गई थी.
कंपनी के वकील की भी दलील सुनी
जजेस पैनल ने कहा कि ब्रिटिश बंग कंपनी लिमिटेड की ओर से वकील की दलील भी सुनी गई. वकील ने दलील दिया था कि पुरुष के साथ-साथ महिलाओं के सिर के बाल भी गिर सकते हैं. इसी बात को आधार में रखकर कंपनी के वकील को बताया गया कि यह हार्मोनल चेंज है. इसका मजाक उड़ाना सैक्सुअल ह्रासमेंट है. बता दें कि गंजापन सिर्फ इंग्लैंड की ही समस्या नहीं है. यह पूरे विश्व में फैली बड़ी समस्या है. कई देशों में पुरुषों में यह तेजी से बढ़ती समस्या है. यह सामाजिक समस्या और भेदभाव की तरह देखी जाने लगी है, जो कि गलत है. गंजेपन की समस्या से परेशान लोगों को कई टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है.
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