
नई दिल्ली. कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का आज 37वां दिन है। किसान दिल्ली बॉर्डर पर ढेरा डाले हुए हैं। सात दौर की बातचीत हो चुकी है। 4 जनवरी को सरकार के साथ अगले दौर की बातचीत होगी। किसानों ने वादा किया था कि 4 जनवरी तक आंदोलन तेज नहीं करेंगे। इस बीच सिंघु बॉर्डर पर 80 किसान संगठनों ने आगे की रणनीति पर चर्चा की।
5 घंटे चली थी 7वें दौर की बातचीत
7वें दौर में सरकार और किसान यूनियनों के बीतचीत में सकारात्मक पहल देखने को मिली थी। किसानों के कई प्रस्ताव में से दो प्रस्तावों पर मोदी सरकार ने अपनी सहमति जता दी है। किसानों और सरकार के बीच छठे दौर की बातचीत में बिजली बिल के मसले को सुलझा लिया गया था। अब पराली जलाना भी जुर्म नहीं होगा। करीब 5 घंटे चली बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि पर्यावरण अध्यादेश पर सहमति बन गई है और ऐसे में अब पराली जलाना जुर्म नहीं होगा और बिजली बिल का मसला भी सुलझ गया है।
50 प्रतिशत समाधान होने की उम्मीद
बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि चार विषयों में से दो मुद्दों पर पारस्परिक सहमति के बाद 50 प्रतिशत समाधान हो गया है और शेष दो मुद्दों पर चार जनवरी को चर्चा होगी। तोमर ने कहा, 'तीन कृषि कानूनों और एमएसपी पर चर्चा जारी है तथा चार जनवरी को अगले दौर की वार्ता में यह जारी रहेगी।' तोमर, रेलवे, वाणिज्य और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल तथा वाणिज्य राज्य मंत्री सोमप्रकाश ने यहां विज्ञान भवन में 41 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की।
कृषि कानूनों के खिलाफ गाजीपुर बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों ने नए साल की पूर्व संध्या पर कैंडल लाइट मार्च निकाला।
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