
नई दिल्ली. दिल्ली में DSSSB द्वारा आयोजित पीजीटी-इकोनॉमिक (महिला) एग्जाम-2021 में कृपाण और कारा(कड़ा) पहनकर पहुंची एक अमृतधारी सिख लड़की को एंट्री नहीं देने के मामले को दिल्ली हाईकोर्ट ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। 17 जुलाई,2021 को हुए एग्जाम देने से वंचित रही लड़की यह मामला कोर्ट तक लेकर गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को इस मामले में अपना आदेश सुनाया। जानिए पहले मामला क्या है?
एक घंटे पहले पहुंचने की गाइडलाइन दी जा सकती थी
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड(Delhi Subordinate Services Selection Board) को कड़े शब्दों में नसीहत दी कि वो एंश्योर करे कि कारा या कृपाण पहनने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए रिपोर्टिंग समय से एक घंटे पहले एग्जाम सेंटर पहुंचने की एडिशनल रिक्वायरमेंट के लिए पर्याप्त नोटिस दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि अन्य भर्ती एजेंसियों से भी इस संबंध में उचित कदम उठाने की उम्मीद की जाती है। जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि DSSSB जैसे एक विशेष निकाय ने इस दिशा में कोई भी कदम उठाने की जहमत नहीं उठाई। जबकि वो नियमित रूप से दिल्ली में सार्वजनिक क्षेत्रों में विभिन्न पदों पर चयन के लिए परीक्षा आयोजित कर रहा है, इन परीक्षाओं में बड़ी संख्या में सिख उम्मीदवार नियमित रूप से बैठते हैं।
मनहरलीन कौन ने उठाया था यह मुद्दा
मनहरलीन कौर ने अपने एडवोकेट कपिल मदन और गुरमुख सिंह अरोड़ा के माध्यम से यह पिटीशन फाइल की थी। इसमें कहा गया कि संविधान के आर्टिकल 14, 19 और 25 के तहत मौलिक अधिकारों की गारंटी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र द्वारा समान दिशानिर्देश सिक्योर और प्रोटेक्टेड हैं। याचिका में उल्लेख किया गया कि दिसंबर 2017 में दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने DSSSB के अध्यक्ष को निर्देश दिया था कि वे इस दिशा में आवश्यक गाइडलाइन जारी करें कि सिख छात्रों को किसी भी परीक्षा में आने पर अपने धार्मिक प्रतीकों को ले जाने की अनुमति दी जाए। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि DSSSB ने इस संबंध में पहले नोटिस जारी नहीं किया। जब याचिकाकर्ता ने कड़ा नहीं हटाया, तो एग्जाम में नहीं बैठने दिया। उसके कपड़ों की आस्तीन आधी काटने को कहा गया। यानी उसे गलत तरीके से एग्जाम मे बैठने से रोका गया। DSSSB की यह कार्यवाही सही नहीं है।
जानिए सिखों में क्यों महत्वपूर्ण और पवित्र है कृपाण
कृपाण सिखों के पवित्र पांच ककारों में से एक है। गुरु गोविंद सिंह ने सिखों के लिए 5 चीजें अनिवार्य की थीं- केश, कड़ा, कृपाण, कंघा और कच्छा। कृपाण को वीरता और साहस की निशानी माना जाता है। सिख इसे कमर में लटका कर रखते हैं। कृपाण 'कृपा' और 'आन' दो शब्दों से मिलकर बना है। सिख धर्म कहता है कि सिखों के अंदर संत और सिपाही दोनों के गुण मौजूद होने चाहिए। सिख धर्म में कृपाण या तलवार रखने की परंपरा छठे सिख गुरु हरगोबिन्द सिंह ने की थी।
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