
नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच विवाद को लेकर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत ने सोमवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, लद्दाख में चीनी अतिक्रमण से निपटने के लिए सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, अगर चीन के साथ बातचीत सफल नहीं होती तो सैन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में बिपिन रावत ने कहा, भारत सरकार शांतिपूर्ण तरीके से मामला सुलझाना चाहती है। उन्होंने इशारा किया कि पूर्वी लद्दाख में सेना की तैयारी पूरी है। उन्होंने कहा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोबाल और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े लोग सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, ताकि लद्दाख में चीनी सेना पहले जैसी स्थिति पर लौट आए।
अलग नजरिए से होता है अतिक्रमण
जनरल रावत ने कहा, एलएसी पर अतिक्रमण अलग नजरिए की वजह से होता है। रक्षा सेवाओं का काम निगरानी रखना और अतिक्रमण को घुसपैठ में तब्दील होने से रोकना है। सरकार चाहती है कि यह मुद्दा बातचीत से शांतिपूर्ण तरीके से हल हो। अगर एलएसी पर पूर्ण स्थिति बहाल करने की कोशिश नाकाम होती हो सैन्य कार्रवाई के लिए सेना हमेशा तैयार रहती है।
चीन ने भारत के सामने रखी शर्त
15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक इसका हल नहीं हुआ है। अब चीन ने तनाव कम करने के लिए भारत के सामने एक शर्त रखी है, इसे भारत ने साफ तौर पर इनकार कर दिया है।
चीन का कहना है कि भारत फिंगर- 4 से जितना पीछा लौटे, उतना ही हम पीछे लौटेंगे। यानी इसका मतलब ये हुआ कि भारत फिंगर 4 से फिंगर 1 पर वापस जाए तो चीन फिंगर 4 से हटकर फिंगर 8 पर अपनी सेना कर लेगा। यानी भारत जहां अभी तक फिंगर 8 तक पेट्रोलिंग करता था, वहीं भारत फिंगर 1 पर सीमित हो जाएगा। भारत ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया।
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