
श्रीनगर। कश्मीर में शनिवार को चिल्लई कलां की शुरुआत हो गई। यह 40 दिन चलेगा। इस दौरान सबसे अधिक सर्दी पड़ती है। लोगों को चिल्लई कलां का इंतजार रहता है। इस दौरान बर्फबारी होती है, जिसे देखने के लिए लोग कश्मीर आते हैं।
मौसम विभाग के अनुसार श्रीनगर में पिछले पांच दशकों में दिसंबर की सबसे ठंडी रात रही। तापमान शून्य से 8.5 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा। घाटी के अन्य हिस्सों में भी न्यूनतम तापमान हिमांक बिंदु से कई डिग्री नीचे चला गया।
श्रीनगर में शुक्रवार रात तापमान शून्य से 8.5 डिग्री सेल्सियस नीचे आ गया। गुरुवार रात तापमान शून्य से 6.2 डिग्री सेल्सियस नीचे था। यह 1974 के बाद से श्रीनगर की सबसे ठंडी दिसंबर की रात थी। 1974 में न्यूनतम तापमान शून्य से 10.3 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया था। दिसंबर में श्रीनगर का अब तक का सबसे कम न्यूनतम तापमान 13 दिसंबर 1934 को शून्य से 12.8 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया था।
भीषण ठंड के कारण श्रीनगर के प्रसिद्ध डल झील के कुछ हिस्सों में पानी जम गया। पहलगाम में न्यूनतम तापमान शून्य से 8.6 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया है। गुलमर्ग में न्यूनतम तापमान शून्य से 6.2 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया।
पंपोर शहर के बाहरी इलाके में स्थित कोनीबल में न्यूनतम तापमान शून्य से 10.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। काजीगुंड में न्यूनतम तापमान शून्य से 8.2 डिग्री सेल्सियस नीचे, कुपवाड़ा में शून्य से 7.2 डिग्री सेल्सियस नीचे और कोकरनाग में शून्य से 5.8 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया।
कश्मीर में तीन महीने सबसे ज्यादा सर्दी पड़ती है। इसे तीन भागों चिल्लई कलां, चिल्लई खुर्द और चल्लई बाचे में बांटा गया है। इन्हें मिलाकर चिल्लस कहा जाता है। चिल्लई-कलां 40 दिनों का होता है। इस दौरान सबसे ज्यादा सर्दी पड़ती है। यह 21 दिसंबर 2024 से शुरू होकर 31 जनवरी 2025 को समाप्त होगी।
चिल्लई-कलां के बाद 20 दिनों का चिल्लई-खुर्द (छोटी ठंड) होता है। यह 31 जनवरी से 19 फरवरी के बीच पड़ता है। इसके बाद के 10 दिनों को चिल्लई-बच्चा (छोटी ठंड) कहा जाता है। यह 20 फरवरी से 2 मार्च तक होता है।
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