
आंध्रप्रदेश में धर्म परिवर्तन कर ईसाई बने लोगों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। यहां धर्म परिवर्तन करने के बाद ईसाई बने लोग अभी भी शेड्यूल कास्ट के लिए तय आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। यह शिकायत नेशनल शेड्यूल कास्ट कमीशन में दायर की गई है। लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम के अध्यक्ष संतोष ने यह शिकायत दर्ज कराई है। इसी तरह की एक शिकायत नेशनल बैकवर्ड कमीशन में दर्ज की गई है।
आंध्रप्रदेश में ईसाई धर्म बताने वालों की जनसंख्या में 1971 के बाद से लगातार कमी आ रही है। जबकि 1961 से लेकर 71 तक इसमें वृद्धि हुई थी। केवल यहां एक जिले गुंटूर की बात करें तो यहां 1971 से 2011 में जनसंख्या 28.44 लाख से 48.87 लाख पहुंच गई है, वहीं, ईसाइयों की जनसंख्या 4.15 लाख से 0.89 लाख हो गई है।
इस डाटा में खास बात यह है कि ईसाइयों की संख्या में कमी हुई है, वहीं, शेड्यूल कास्ट की संख्या में वृद्धि हुई है।
जनसंख्या में कमी की दो मुख्य वजह
ईसाइयों की जनसंख्या में कमी की दो मुख्य वजह हो सकती हैं। पहली या तो ईसाई बने लोग दोबारा धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। या फिर जानकारी छिपाई जा रही है। यहां दूसरी वजह ही सही होती नजर आ रही है।
ईसाइयों की जनसंख्या में हो रही कमी का संभावित कारण यह है कि जो लोग चोरी छिपे ईसाई बन रहे हैं, वे सच्चाई छिपा रहे हैं। वे आधिकारिक तौर पर शेड्यूल कास्ट में बने हुए हैं, और ईसाई अनुष्ठान कर रहे हैं। यह जानकारी राज्य सरकार से मिली जानकारी से ही स्पष्ट हो सकती है।
शेड्यूल कास्ट के लोगों को मिल रहा क्रिसमस गिफ्ट
यहां तक की आंध्रप्रदेश में जगन रेड्डी की सरकार आने के बाद भी चंद्रबाबू नायडू की सरकार में शुरू हुई क्रिसमस गिफ्ट की परंपरा को जारी रखा गया। इसके तहत सफेद राशन कार्ड वाले शेड्यूल कास्ट के लोगों को भी इसके लिए चयनित किया गया। कमीशन में दर्ज शिकायत में कहा गया है कि यह हिंदू और ईसाई दोनों का अपमान है।
आरोप है कि ऐसा इसलिए हुआ क्यों कि ईसाई धर्मांतरण का सही तरह से लेखा जोखा नहीं रखा गया। यह भी आरोप हैं कि सरकार भी धर्मांतरण में मदद कर रही है। इस मामले में जांच की भी मांग की गई है।
चार्जशीट में दावा किया गया है कि शेड्यूल कास्ट में बड़ी संख्या में लोगों का धर्म परिवर्तन कराया गया है। इन लोगों को अभी भी शेड्यूल कास्ट में ही माना जा रहा है।
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