
बेंगलुरु। उडुपी पुलिस द्वारा सरकारी परियोजनाओं में शामिल एक ठेकेदार की मौत (Contractor death case) के मामले में केस दर्ज करने के कुछ दिनों बाद कर्नाटक के मंत्री केएस ईश्वरप्पा (KS Eshwarappa) ने घोषणा की कि वह शुक्रवार शाम को पद छोड़ देंगे। मंत्री ने कहा, "कल मैं मुख्यमंत्री को इस्तीफा सौंप रहा हूं। सहयोग के लिए मैं आप सभी का धन्यवाद करता हूं।"
पुलिस ने बुधवार को बताया था कि उडुपी में एक सिविल ठेकेदार की मौत पर ईश्वरप्पा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। ईश्वरप्पा को इस मामले में पहला आरोपी बनाया गया था। प्राथमिकी मंगलवार रात को संतोष पाटिल के भाई प्रशांत पाटिल की शिकायत के बाद दर्ज की गई थी। संतोष पाटिल ने मंत्री के खिलाफ रिश्वत मांगने के आरोप लगाए थे। पाटिल मंगलवार को उडुपी के एक लॉज में मृत पाए गए थे। प्रशांत की शिकायत में मंत्री ईश्वरप्पा और उनके स्टाफ सदस्यों रमेश और बसवराज को आरोपी बनाया गया है।
4 करोड़ रुपए का काम कराया, नहीं मिला पैसा
प्रशांत पाटिल ने अपनी शिकायत में कहा कि वर्ष 2020-21 में हिंडालगा गांव के निवासियों ने ईश्वरप्पा से मुलाकात की थी और उनसे गांव में सड़कें, नालियां और फुटपाथ बनाने का अनुरोध किया था। ईश्वरप्पा ने बजट की चिंता किए बिना काम शुरू करने की अनुमति दी, जिसके बाद संतोष पाटिल को ठेका दिया गया। शिकायतकर्ता ने कहा कि उसके भाई ने गांव में 4 करोड़ रुपए का काम किया था। उन्होंने परियोजना में अपना पैसा लगाया था, लेकिन काम के बदले पैसा नहीं मिला था। संतोष कई बार मंत्री ईश्वरप्पा से मिले और उनसे राशि जारी करने की गुहार लगाई, लेकिन उनके करीबी सहयोगी बसवराज और रमेश 40 फीसदी कमीशन की मांग कर रहे थे।
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ईश्वरप्पा ने पहले कहा था नहीं दूंगा इस्तीफा
ईश्वरप्पा ने पहले कहा था कि वह इस्तीफा नहीं देंगे और पूरी पुलिस जांच का इंतजार करेंगे। ईश्वरप्पा ने कहा था कि इस्तीफे का कोई सवाल ही नहीं है। इस बारे में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नलिन कुमार कतील और मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को सूचित कर दिया गया है। मैं कर्नाटक के लोगों से कहना चाहता हूं कि हमें एक अनुकरणीय जांच करनी होगी और पता लगाना होगा कि इस साजिश के पीछे कौन है। यह मेरी मांग है। यह सब करने के लिए संतोष को किसने उकसाया? उसे दिल्ली किसने भेजा? उनके लिए डेथ नोट किसने लिखा था? एक जांच से ही यह सब पता चल सकता है।
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