
नई दिल्ली: सिविल सेवा परीक्षा के नियमों का उल्लंघन करने वाली प्रोबेशन पर तैनात IAS अधिकारी पूजा खेडकर के खिलाफ केंद्र ने कार्रवाई की है. भारतीय प्रशासन सेवा (IAS) से पूजा खेडकर को केंद्र ने बर्खास्त कर दिया है. प्रवेश के लिए जमा किए गए सर्टिफिकेट फर्जी पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है. गंभीर आरोपों का सामना कर रहीं पूजा खेडकर के खिलाफ केंद्र सरकार ने आखिरकार IAS से बर्खास्त करने की कड़ी कार्रवाई की है.
नियमों का उल्लंघन करके सिविल सेवा परीक्षा लिखने के आरोप में UPSC ने पूजा को अयोग्य घोषित करते हुए कार्रवाई की थी. आयोग की परीक्षाओं से आजीवन प्रतिबंध भी लगाया गया था. पिछले महीने UPSC ने एक आदेश जारी कर पूजा की IAS प्रोविजनल कैंडिडेचर रद्द कर दी थी. केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय द्वारा नियुक्त एक सदस्यीय जांच आयोग की रिपोर्ट सरकार को सौंपने के बाद यह कार्रवाई की गई थी.
आयोग ने पाया था कि IAS बनने के लिए पूजा ने OBC नॉन क्रीमीलेयर सर्टिफिकेट और दिव्यांगता प्रमाण पत्र का दुरुपयोग किया था और कार्रवाई की सिफारिश की थी. इस कार्रवाई के बाद अब केंद्र सरकार ने भी IAS से बर्खास्त कर दिया है. पूजा खेडकर मामले की पृष्ठभूमि में, UPSC पैनल ने बताया कि 2009-2023 की अवधि में IAS स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी करने वाले 15,000 से अधिक उम्मीदवारों के विवरणों की जांच की गई है.
पुणे में सब कलेक्टर रहते हुए पूजा के पॉवर के दुरुपयोग की खबरें सामने आने के बाद मामला सामने आया था. इसके बाद उनका तबादला कर दिया गया था. बाद में उनके सर्टिफिकेट की प्रामाणिकता पर सवाल उठे. इसके बाद मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी ने पूजा को वापस बुला लिया.
ट्रेनिंग रोककर वापस लौटने का निर्देश दिया गया था. महाराष्ट्र के अपर मुख्य सचिव नितिन गड्रे ने स्पष्ट किया था कि 16 जुलाई को राज्य सरकार के साथ पूजा की ट्रेनिंग पूरी हो गई थी. पूजा 2023 बैच की IAS अधिकारी हैं. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पूजा के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मामला दर्ज किया है. फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र जमा करके उन्होंने कई बार UPSC की परीक्षा दी थी.
UPSC परीक्षा में उन्हें 841वीं रैंक मिली थी. अहमदनगर की रहने वाली पूजा 2023 बैच की IAS अधिकारी हैं. नियमों के मुताबिक एक ट्रेनी को लाल-नीली बत्ती, वीआईपी नंबर प्लेट, रहने की सुविधा, पर्याप्त स्टाफ वाला ऑफिस चैंबर, कांस्टेबल जैसी सुविधाएं नहीं दी जाती हैं, लेकिन उन्होंने ऐसी मांगें रखी थीं. इसके अलावा अपनी निजी ऑडी कार में लाल-नीली बत्ती और वीआईपी नंबर प्लेट का इस्तेमाल और निजी कार में 'महाराष्ट्र सरकार' का बोर्ड लगाना भी काफी विवादों में रहा था.
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