
इंदौर. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने मानों पूरे देश को हिलाकर रख दिया। घर-घर में डर बैठ गया था। लोग घरों में बंद रहकर भी दहशत में थे। लेकिन बीमारी कोई भी हो; जिनके अंदर जीने की इच्छा शक्ति होती है, वे उसे हरा ही देते हैं।
Asianet news के लिए अमिताभ बुधौलिया ने इंदौर की रहने वालीं क्रियेटिव प्रोफेशनल प्रतिभा जैन से बातचीत की, जो कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के शुरुआती दिनों में पॉजिटिव हुई थीं। तब कोरोना खतरनाक तरीके से बढ़ रहा था, लेकिन प्रतिभा ने अपनी इच्छा शक्ति के बूते संक्रमण पर विजयी पाई।
गुरुजी की मृत्यु के समाचार के बीच मैं भी पॉजिटिव हो गई थी
इस बार कोरोना वायरस ने शरीर को ही नहीं, इंसान की हिम्मत, उसकी उम्मीदों को भी बीमार कर दिया था। चारों तरफ भय और मातम सा पसरा था। पिछले लाकडाउन की तरह इस बार सख्ती के बिना भी लोग घरों में थे। रोज किसी न किसी अपने के खत्म होने की खबरों के बीच मुझे मेरे रंग गुरु केके राजन जी की कोरोना से असमय मत्यु का दु:खद समाचार मिला। इसने मुझे न सिर्फ दु:खी किया, बल्कि बेचैन भी कर दिया। लगभग 10 दिन हो चुके थे मैंने अपने घर के बाहर कदम भी नहीं रखा था। फिर भी 24 अप्रैल को मुझे हल्की सर्दी महसूस हुई। मैने तुरंत गर्म पानी, भाप और हल्दी का दूध लेना शुरू किया। दो दिनों में सर्दी ठीक भी हो गई। तीसरे दिन सुबह उठी, तो कोई तकलीफ़ नहीं थी। पर मैने पाया कि रूम स्प्रे की खुशबू महसूस नहीं हो रही है। इसके बाद मैंने और भी कई चीजें सूंघीं, पर हल्की गंध वाली चीजें नहीं सूंघ पा रही थी। इसके चलते मैने टेस्ट करवाया। देर रात टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। यह जानकर सब डर गए। मेरे पति मेरे साथ दिन भर थे, इसलिए उनकी और माता जी की भी जांच करवा ली। सौभाग्य से माता जी की रिपोर्ट निगेटिव थी।
70-80 तक पहुंच गया था ऑक्सीजन लेवल
मुझे अगले दो ही दिन में तेज बुखार होने लगा। इसके कारण कुछ भी खाना मुश्किल हो रहा था। हालांकि डाक्टर और बाकी लोगों (जिन्होंने corona से जंग जीती थी) की सलाह मानते हुए मैने खाना बंद नहीं किया। तीसरे दिन मेरा ऑक्सीजन लेवल 75-80 होने लगा। ऐसे में मुझे अस्पताल में भर्ती किया गया। सच पूछिए तो उस समय ऐसा लगा जैसे पता नहीं मैं दोबारा अपने घर लौट पाऊंगी या नहीं! पर मैं जानती थी, इस वायरस से लड़ने के लिए मुझे हिम्मत से काम लेना होगा। दवाइयां अपना काम करती हैं और हौसला अपना। मैने जीने कि तीव्र इच्छा बनाए रखी। अस्पताल में भी मेरा बुखार कम नहीं हो रहा था। पर ऑक्सीजन लेवल ठीक था। प्राइवेट अस्पताल की हालत भी सरकारी की तरह हो गई थी। स्टाफ बहुत ज्यादा थका हुआ था। ज्यादा लोग नौसिखिए थे। ऐसे में खुद का ख्याल खुद भी रखना पड़ रहा था।
21 साल के लड़के की मौत ने डरा दिया
इसी दौरान देर रात अस्पताल में किसी का एडमिशन हुआ और पता चला कि कुछ ही घंटो में उसकी मौत भी हो गई। सुबह मालूम हुआ कि वो सिर्फ 21 साल का लड़का था। स्वाभाविक था कि इस घटना ने डरा दिया था, पर मैंने खुद को विश्वास दिलाया कि मैं ठीक होकर वापिस जाऊंगी।
अगली सुबह फिजियो थेरेपिस्ट ने कुछ एक्सरसाइज करवाईं, तब मालूम हुए की मेरी सांसें सीने में जाकर अटक रही हैं। ऐसे लग रहा था; जैसे किसी ने अन्दर रूई भर दी हो। मुझे लगा; पता नहीं ये कभी ठीक होगा या नहीं। गहरी सांस लेना और रोकना नामुमकिन लग रहा था। पर डॉक्टर ने कहा लगातार व्यायाम से ये ठीक हो जाएगा। 5 दिन बाद मुझे अस्पताल से छुट्टी मिली। पर असली जंग अभी बाकी थी। वायरल फीवर वैसे भी शरीर को बहुत कमजोर कर देता है, पर कोरोना वायरस ने तो तोड़ ही दिया था। प्रोटीन युक्त हेल्थी खाना ,फल, दवाइयां और नियमित सांस संबंधित व्यायाम और लगभग एक माह गर्म पानी से काफी हद तक कमजोरी दूर की और रिपोर्ट भी निगेटिव आ गई।
वायरस से ज्यादा डर मार रहा
लोगों को वायरस से ज्यादा लापरवाही और डर मार रहा है। थोड़ा भी बीमार होने पर समय रहते ट्रीटमेंट और सकारात्मक सोच से लोग बड़ी आसानी से कारोना को हरा सकते हैं। मुझे घर पर रहते हुए ही इंफेक्शन हुआ था। लेकिन लक्षण दिखते ही हमने इलाज करवा लिया, इसलिए इससे बच पाए। इस दौरान मैंने सीखा कि हमारे शरीर पर मन के विचारों का बहुत प्रभाव पड़ता है, इसलिए सोच सकारात्मक रखना बहुत ज़रूरी है।
Asianet News का विनम्र अनुरोधः आइए साथ मिलकर कोरोना को हराएं, जिंदगी को जिताएं...। जब भी घर से बाहर निकलें माॅस्क जरूर पहनें, हाथों को सैनिटाइज करते रहें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वैक्सीन लगवाएं। हमसब मिलकर कोरोना के खिलाफ जंग जीतेंगे और कोविड चेन को तोड़ेंगे। #ANCares #IndiaFightsCorona
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