
अहमदाबाद. महाराष्ट्र, दिल्ली समेत कई राज्यों में कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज में प्लाज्मा थैरेपी का इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन अब एक ऐसी दवा बनाई जा रही है, जो कोरोना मरीजों के लिए प्लाज्मा थैरेपी का विकल्प बनेगी। अहमदाबाद की फार्मा कम्पनी इंटास फार्मास्युटिकल का दावा है कि इस दवा के इस्तेमाल के बाद प्लाज्मा थैरेपी की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस दवा को ह्यूमन प्लाज्मा से बनाया गया है।
इंटास फार्मास्युटिकल के नियामक मामलों के हेड डॉ आलोक चतुर्वेदी ने बताया, यह पहली ऐसी दवा है जो पूरी तरह से स्वदेशी है। इस दवा (हाइपरइम्यून ग्लोब्युलिन) को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से ह्यूमन ट्रायल की अनुमति मिल गई है। अगले महीने गुजरात और अन्य राज्यों के अस्पतालों में इसका ट्रायल भी शुरू हो जाएगा।
दवा का परीक्षण रहा सफल
डॉ आलोक ने बताया कि अब तक हुए परीक्षण सफल रहे हैं। यह दवा मानव प्लाज्मा से बनी है। इसलिए इसके परिणाम परीक्षण के एक महीने के भीतर आने की उम्मीद है। अगर आगे के परीक्षण सफल रहते हैं तो अगले तीन महीनों में दवा लॉन्च करने की तैयारी की जाएगी। हालांकि, उत्पादन की अनुमति लेने में 1 महीने का और वक्त लगेगा।
उन्होंने बताया कि अभी कोरोना मरीज को प्लाज्मा की 300 एमजी के साथ थैरेपी दी जाती है। इसमें यह भी तय नहीं है कि यह किस मरीज को किस हद तक प्रभावित करती है। लेकिन नई दवा की 30 एमजी खुराक ही पर्याप्त होगी।
क्या है प्लाज्मा थैरेपी?
कोरोना के जो मरीज ठीक होते हैं, उनके शरीर में मौजूद इम्यून सिस्टम ऐसे एंटीबॉडीज बनाता है जो उम्रभर बना रहता है। ये एंटीबॉडीज ब्लड प्लाज्मा में भी मौजूद रहते हैं। इस ब्लड से प्लाज्मा को अलग किया जाता है और इसमें एंटीबॉडीज निकाली जाती है, ये एंटीबॉडीज नए मरीज के शरीर में इंजेक्ट की जाती हैं, इसे प्लाज्मा थैरेपी कहते हैं।
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