'डेटा पारदर्शिता के मामले में कोवैक्सिन नंबर 1; 12 महीनों में छपी 9 रिपोर्ट्स में प्रभाव को बताया गया

Published : Jun 12, 2021, 08:36 PM ISTUpdated : Jun 12, 2021, 08:43 PM IST
'डेटा पारदर्शिता के मामले में कोवैक्सिन नंबर 1; 12 महीनों में छपी 9 रिपोर्ट्स में प्रभाव को बताया गया

सार

अमेरिका के फूड एंड ड्रग्स ऐडनिस्ट्रेशन यानी एफडीए से कोवैक्सिन को आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी ना मिलने के बाद भारत बायोटेक की ओर से एक और बयान जारी किया गया है। भारत बायोटक का कहना है कि कोवैक्सिन डेटा पारदर्शिता के कई मामलों में पहले नंबर पर है। इसके अलावा कंपनी ने  पिछले 12 महीनों में छपी 9 रिपोर्ट्स में इसे प्रभावी भी माना गया है। 

नई दिल्ली. अमेरिका के फूड एंड ड्रग्स ऐडनिस्ट्रेशन यानी एफडीए से कोवैक्सिन को आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी ना मिलने के बाद भारत बायोटेक की ओर से एक और बयान जारी किया गया है। भारत बायोटक का कहना है कि कोवैक्सिन डेटा पारदर्शिता के कई मामलों में पहले नंबर पर है। इसके अलावा कंपनी ने  पिछले 12 महीनों में छपी 9 रिपोर्ट्स में इसे प्रभावी भी माना गया है। 

कंपनी ने बयान जारी कर कहा,  भारत के नियामकों ने कोवैक्सीन टीके के पहले और दूसरे चरण में हुए परीक्षण के संपूर्ण आंकड़ों और तीसरे चरण के आंशिक आंकड़ों की समीक्षा गहनता से की है। इसके बाद ही वैक्सीन को इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिली है। इसके अलावा समीक्षा के लिए कंपनी पहले ही कोवैक्सिन की सुरक्षा और प्रभाव को लेकर पिछले 12 महीनों में नौ अनुसंधान रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर 5 बड़े जनरल में प्रकाशित कर चुका है। 

- कंपनी ने कहा, कोवैक्सिन पहली ऐसी वैक्सीन है, जो निष्क्रिय कोरोना वायरस आधारित टीका है, जिसने भारत में सभी मानव ट्रायल के आंकड़े प्रकाशित किए हैं। 
- यह इकलौतती ऐसी वैक्सीन है जिसके पास सामने आ रहे वायरस के नए प्रकार को लेकर कोई आंकड़ा है।
-  यह एकमात्र कोविड-19 टीका है जिसके पास भारतीय आबादी पर प्रभाव को लेकर आंकड़े हैं।'

इन जर्नल में प्रकाशित हुए आंकड़े
कंपनी ने कहा कि भारत बायोटेक ने तीन प्रीक्लीनिकल अध्ययन किए जिसे प्रमुख पीयर-रिव्‍यूड जर्नल 'सेलप्रेस' में प्रकाशित किया गया। कोवैक्सिन टीके के पहले और दूसरे चरण के परीक्षण को प्रमुख जर्नल 'द लांसेट' में प्रकाशित किया गया। कंपनी ने कहा कि कोवैक्सीन के कोरोना वायरस के अन्य प्रकारों को निष्क्रिय करने संबंधी अध्ययन के आंकड़े पहले ही बायोरेक्सिव, क्लीनिकल इंफेक्शियस डीजीज और जर्नल ऑफ ट्रैवेल मेडिसिन में प्रकाशित हो चुके हैं।

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