
तिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram). केरल की शीर्ष मंदिर इकाई त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) ने 'सबरीमला अरवणा' सहित विभिन्न मंदिर प्रसादम (प्रसाद) का पेटेंट कराने का निर्णय किया है जिससे कि श्रद्धालुओं को कोई नकली उत्पाद न बेच पाए।
त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) अपने इतिहास में पहली बार 'अंबालपुझा पल्पायसम', 'कोट्टरक्कारा उन्नीयप्पम' और 'अरवणा' जैसे विशिष्ट प्रसादों का पेटेंट प्राप्त करने की योजना बना रहा है। ये प्रसाद बोर्ड द्वारा प्रबंधित मंदिरों में अर्पित किए जाते हैं। इन प्रसादों का पेटेंट मिलने से अन्य लोग समान नाम से कोई प्रसाद नहीं बेच पाएंगे।
'अरवणा' प्रसाद 'सबरीमला भगवान अय्यप्पा मंदिर' में चढ़ाया जाता है। वहीं, 'उन्नीयप्पम' और 'पल्पायसम' क्रमश: 'कोट्टरक्कारा गणपति मंदिर' और 'अंबालपुझा श्रीकृष्ण मंदिर' में अर्पित किए जाते हैं। यदि सबकुछ ठीक रहा तो इन प्रसादों को भौगोलिक वस्तु चिह्न (पंजीकरण एवं सुरक्षा) कानून के तहत पेटेंट मिल जाएगा। ये सभी प्रसाद अपने विशिष्ट स्वाद और निर्माण विधि के चलते काफी प्रसिद्ध हैं।
टीडीबी के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि संबंधित कदम इसलिए उठाया जा रहा है, ताकि कोई नकली प्रसाद न बेच सके। प्रसादम के नाम से नकली उत्पाद बेचने के कई उदाहरण मिल चुके हैं। मंदिर इकाई के अध्यक्ष ए. पद्मकुमार ने पीटीआई से कहा, "हमने इस तरह की धोखाधड़ी के खिलाफ कई कानूनी कदम उठाए हैं। इसके मद्देनजर हमने प्रसिद्ध मंदिरों में अर्पित किए जाने वाले अपने विशिष्ट प्रसादों का पेटेंट कराने के लिए आवेदन दायर करने का निर्णय किया है।"
[यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है]
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