
नई दिल्ली. नेशनल डिफेंस कॉलेज (एनडीसी) की डायमंड जुबली के मौके पर गुरूवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस कार्यक्रम में को संबोधित किया है। 'भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा- एक दशक आगे' विषय पर आयोजित यह दो दिवसीय वेबिनार 05-06 नवंबर तक चलेगा। कार्यक्रम के आयोजन में रक्षामंत्री राजनाथ ने कहा कि 'मुझे एनडीसी की डायमंड जुबली के अवसर पर इसे संबोधित करते हुए बहुत प्रसन्नता है क्योंकि ये कॉलेज हमारे देश के लोगों को रणनीतिक गुण सिखाने वाली शीर्ष जगह है।' उन्होंने इसके 60 वर्ष पूरे होने पर एनडीसी के कमांडेंट और कर्मचारियों को बधाई दी है।
भारत की रक्षा-सुरक्षा पर क्या बोले राजनाथ सिंह
अपने संबोधन में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अपनी आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को लेकर अडिग है। भारत एकपक्षीयता और आक्रामकता के सामने अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्रों के विकास और पीड़ितों को न्याय के प्रावधान सहित आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों के प्रति 3-आयामी दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
किन तीन चुनौतियों से भारत अपनी संप्रभुता और अखंडता को बचाने में सक्षम?
पहला बाहरी खतरों और आंतरिक चुनौतियों से भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को सुरक्षित करने की क्षमता बढ़ाना। दूसरा, भारत की आर्थिक वृद्धि को सुविधाजनक बनाने वाली सुरक्षित और स्थिर स्थिति बनाने की क्षमता, जिससे राष्ट्र निर्माण के लिए संसाधनों का निर्माण और आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके। तीसरा, उन क्षेत्रों में सीमाओं से परे अपने हितों की रक्षा करने की इच्छा में स्थिर रहते हैं जहां हमारे लोग निवास करते हैं। रक्षामंत्री ने कहा कि इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर हम अपनी सुरक्षा नीति में भारी बदलाव लाए हैं जो मजबूत, कानूनी और नैतिक रूप से उचित है।
चीन को लेकर क्या कहा रक्षामंत्री राजनाथ ने?
चीन के साथ सीमा पर जारी गतिरोध के बीच रक्षामंत्री ने कहा कि भारत अपनी सीमाओं पर कईं चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा है कि भारत एक शांतिप्रिय देश है और वह शांतिपूर्ण तरीके से अपने पड़ोसी देशों के साथ मतभेदों को समाप्त करना चाहता है। बता दें कि भारत और चीन के बीच मई की शुरुआत से ही पूर्वी लद्दाख में सीमा पर तनाव जारी है।
दुनिया के अग्रणी संस्थानों में से एक है एनडीसी
दरअसल, एनडीसी दुनिया के उन अग्रणी संस्थानों में से एक है जो भारत और अन्य देशों के सशस्त्र बलों और सिविल सेवा के चुनिंदा वरिष्ठ अधिकारियों के बौद्धिक विकास और रणनीतिक प्रशिक्षण के लिए समर्पित है। पहला एनडीसी कोर्स 1960 में 21 प्रतिभागियों के साथ आयोजित किया गया था। इस डायमंड जुबली के मौके पर एनडीसी के 100 प्रतिभागी, भारत से 75 और मित्र देशों से 25 शामिल होंगे। यह सशस्त्र बलों और सिविल सेवा दोनों में उच्च प्रबंधन के लिए सबसे प्रतिष्ठित संस्थान है। एनडीसी कार्यक्रम में बहुत ही शानदार पूर्व छात्र रहे हैं। वर्तमान में सीडीएस, दो राज्यपाल, वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, दो चुनाव आयुक्त, 30 सेवा प्रमुख और 74 विदेशी सेवा अधिकारी, 20 से अधिक राजदूत, 4 रक्षा सचिव, 5 विदेशी सचिव एनडीसी के पूर्व छात्र हैं।
विदेशी पूर्व छात्रों ने भी एनडीसी के तहत भारत में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किए हैं जैसे...
1. महामहिम जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक, द किंग ऑफ भूटान
2. लेफ्टिनेंट जनरल हुसैन मुहम्मद इरशाद, पूर्व राष्ट्रपति, बांग्लादेश
3. लेफ्टिनेंट जनरल फ्रेडरिक विलियम क्वासी अकफू, पूर्व प्रमुख, घाना
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