
जामा मस्जिद। दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने रविवार (25 फरवरी) को भव्य मस्जिद के प्रांगण में आयोजित दस्तारबंदी समारोह में अपने बेटे को 14वां नया इमाम घोषित किया। इससे पहले वो नायब इमाम थे। इस समारोह में प्रार्थना के बाद अगले इमाम के सिर पर दस्तारबंदी (पगड़ी) बांधना होता है। बता दें कि कल देश भर के मुसलमानों ने शब-ए-बारात का पर्व मनाया, जिसे माफी की रात भी कहा जाता है। ये एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो रविवार को इस्लामी कैलेंडर के आठवें महीने शाबान की 14वीं और 15वीं रात को मनाया जाता है। इसी मौके पर जामा मस्जिद में दस्तारबंदी समारोह का आयोजन किया गया।
सैयद अहमद बुखारी ने कहा, "यह इबादत की रात है। यह गुनाहों से माफी की रात है। सभी को खामोशी से इबादत करनी चाहिए और बाद में सभी को अपने-अपने घर चले जाना चाहिए।" उन्होंने दस्तारबंदी समारोह के दौरान जामा मस्जिद के इतिहास के बारे में बताया कि पहले शाही इमाम को सम्राट शाहजहां ने नियुक्त किया था।
400 सालों से इमाम चुनने की परंपरा
परंपराओं के मुताबिक जामा मस्जिद के इमाम ने अपने जीवनकाल में ही अपने उत्तराधिकारियों की घोषणा कर दी है। इस पर जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कहा कि जामा मस्जिद के पहले शाही इमाम सैयद अब्दुल गफूर शाह बुखारी थे। उन्हें 63 साल की उम्र में शाही इमाम नियुक्त किया गया था। ये परंपरा बीते 400 सालों से चली आ रही है। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि मैं इस जामा मस्जिद से मैं घोषणा करता हूं कि सैयद शाबान बुखारी मेरे उत्तराधिकारी हैं। ये घोषणा उन्होंने मस्जिद में मौजूद इस्लामिक स्कॉलरों के बीच में की।
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