
नई दिल्ली. दिल्ली हिंसा को लेकर पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की मौत और हिंसा के आरोपी पार्षद ताहिर हुसैन की लाइसेंसी पिस्टल और कई कारतूस जब्त किए गए हैं। पिस्टल को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया, जिससे पता चल सके कि इस पिस्टल से फायर हुआ था या नहीं। मोबाइल भी बरामद किया गया। ताहिर हुसैन को 7 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। आरोप लगने के बाद आम आदमी पार्टी ने ताहिर हुसैन को पार्टी से निकाल दिया है।
मोबाइल से मिली थी आखिरी लोकेशन
ताहिर हुसैन के मोबाइल से आखिरी लोकेशन मिली थी, जिसके मुताबिक 24 से 27 फरवरी तक उसकी लोकेशन मुस्तफाबाद इलाके में ही थी। 27 फरवरी को ताहिर हुसैन के फोन की आखिरी लोकेशन जाकिरनगर की मिली। इसके बाद ताहिर का फोन बंद हो गया था।
6 दिन से फरार था ताहिर हुसैन
ताहिर हुसैन को 5 मार्चो को गिरफ्तार किया गया। उससे पहले वह 6 दिन तक फरार था। इस दौरान ताहिर मुस्तफाबाद में रहने वाले 3-4 लोगों ने पुलिस से बचने में उसकी मदद की।
हिंसा में और कौन-कौन शामिल?
क्राइम ब्रांच को ताहिर के सौतेले भाई की भी खोज है। वह फरार चल रहा है। पुलिस को शक है कि हिंसा के दौरान ताहिर हुसैन की छत से पत्थर, पेट्रोल बम फेंके जा रहे थे उस वक्त ताहिर हुसैन का भाई भी वहां पर मौजूद था। चांदबाग हिंसा में भी उसकी भूमिका सामने आई है।
ताहिर हुसैन ने कपिल मिश्रा पर आरोप लगाया था
पुलिस हिरासत से पहले ताहिर हुसैन ने एक टीवी इंटरव्यू में कपिल मिश्रा पर फंसाने का आरोप लगाया था। ताहिर ने कहा था कि हमारे पुराने साथी कपिल मिश्रा रहे हैं। उनका ही इसमें कोई खेल रहा है। मेरे खिलाफ जिस तरह साजिश रची गई, जब मैं 24 को वहां से निकल गया तो 25 तारीख की घटना में मेरा नाम कैसे आ रहा है।
कब शुरू हुई थी दिल्ली हिंसा?
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में 23 फरवरी (रविवार) की शाम से हिंसा की शुरुआत हुई। इसके बाद 24 फरवरी पूरे दिन और 25 फरवरी की शाम तक आगजनी, पत्थरबाजी और हत्या की खबरें आती रहीं। हिंसा में 47 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में एक हेड कॉन्स्टेबल और एक आईबी का कर्मचारी भी शामिल है।
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